वंदे मातरम तो कोई मुद्दा नहीं
भोपाल. वंदे मातरम देश की आजादी का गान है। इसका उपयोग किसी राजनीतिक मुद्दे की तरह नहीं करना चाहिए। जो भी संस्थाएं अपने किसी राजनीतिक या धार्मिक लाभ के लिए इसे मुद्दे की तरह उठाती हैं, लोगों को उनके झांसे में नहीं आना चाहिए।
वंदे मातरम के रचना दिवस पर शनिवार शाम छह बजे स्वराज भवन में संस्था प्रज्ञा प्रवाह द्वारा आयोजित गोष्ठी में यह विचार उभरकर आए। इस अवसर पर मप्र के संस्कृति सचिव मनोज श्रीवास्तव, राष्ट्रीय धर्मनिरपेक्ष संघ संयोजक एलएस हरदेनिया, मप्र अल्पसंख्यक वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनवर मोहम्मद खान, प्रोफेसर रामेश्वर मिश्र सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम के गायन से हुआ। श्री हरदेनिया ने वंदेमातरम की रचना और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में इसके योगदान पर प्रकाश डाला। लखनऊ की दारूल-उलूम देवबंद संस्था द्वारा वंदे मातरम को गैर-इस्लामिक करार देने की भी यहां निंदा की गई। अनवर मो. खान, श्री श्रीवास्तव सहित अन्य वक्ताओं ने भी वंदे मातरम को धर्म से परे बताया। बताते हुए इसके गायन को सभी धर्म के लोगों के लिए गौरव की बात बताया।










