ईओडब्ल्यू का छापा करोड़ों की संपत्ति का पता चला
भोपाल. जल संसाधन विभाग के सात इंजीनियरों के ठिकानों पर आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) के छापे में करोड़ों की बेनामी संपत्ति का पता चला है। हर इंजीनियर ने करोड़ों का निवेश कर रखा है। छापे की कार्रवाई रविवार को भी जारी रहेगी। ईओडब्ल्यू की पिछले दो महोनों में यह आठवीं बड़ी कार्रवाई है।
ईओडब्ल्यू की टीम ने ग्वालियर में शनिवार की सुबह सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता एचडी जोशी, कार्यपालन यंत्री राजेश कुमार श्रीवास्तव, एके दीक्षित, सीएम मिश्रा, बीएस यादव, उदय लाले और आरके नाहर के निवास पर छापे मारे। श्री जोशी के दोनों निवासों पर ताला लगा मिलने पर उन्हें सील कर दिया गया। शेष छह इंजीनियरों के घरों में ली गई तलाशी में अब तक करीब सात करोड़ की संपत्ति का पता चला है।
बड़ी मात्रा में मिली बेनामी संपत्ति का आंकलन किया जा रहा है। कार्रवाई में अब तक आधा दर्जन से अधिक लॉकरों की चाबी मिल चुकी है। यह लॉकर सोमवार को खोले जाएंगे। श्री जोशी फिलहाल इंदौर में हैं। रविवार को उनके ग्वालियर पहुंचने पर उनके निवासों पर छानबीन की जाएगी। ईओडब्ल्यू के अधिकारियों के अनुसार एक-एक इंजीनियर के नाम से 15-15 बैंक खातों की जानकारी मिली है।
श्री जोशी ने रिटायरमेंट से ठीक पहले बड़ी मात्रा में गैर जरूरी सामान खरीदा। जो नहर तैयार नहीं हुई, उसके नाम से पाइप, बोर्ड आदि खरीद लिए गए। आम तौर पर 10-15 हजार में तैयार होने वाले बोर्ड के 3 लाख रुपए तक चुकाए गए। हर एक के पास सफारी जैसी महंगी गाड़ियां हैं।
ईओडब्ल्यू के डीजी एसएस लाल के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई थी कि इन इंजीनियरों ने शासन को 10 करोड़ से अधिक की आर्थिक क्षति पहुंचाई है। उन्होंने बताया कि छापे की कार्रवाई रविवार को भी जारी रहेगी और सोमवार को लॉकर खोले जाएंगे।
कार्यालयों पर भी छापा
ईओडब्ल्यू ने राजघाट परियोजना के ग्वालियर, डबरा, दतिया और करेरा स्थित कार्यालयों पर भी छापा मार कर बड़ी मात्रा में रिकॉर्ड जब्त किया। इस प्रकरण में विभाग के 20 से अधिक इंजीनियरों के अलावा वरिष्ठ लेखापाल, ठेकेदार व सप्लायर शामिल हैं। सीएम मिश्रा के अलावा शेष सभी को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।










