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Sunday, November 08, 2009 07:14 [IST]  

danik bhaskarछत्तीसगढ़ी में होगी शिक्षा की शुरुआत

Bhaskar News

रायपुर. राज्योत्सव के समापन अवसर पर राजधानी में प्रदेशभर के साहित्यकारों का जुटना एक गौरव की बात है। साहित्यकारों के सहयोग से ही छत्तीसगढ़ी भाषा को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी और ऐसा होकर रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने शनिवार को साहित्यकार सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में इस आशय के विचार व्यक्त किए। छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के इस आयोजन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 15 साहित्यकारों का सम्मान मुख्यमंत्री ने किया।



स्कूल शिक्षामंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास के लिए स्कूलों में प्राथमिक स्तर पर पढ़ाई शुरू करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इसके लिए राजभाषा आयोग की सहायता से प्रदेश के साहित्यकारों का एक पैनल जल्द ही बनाया जाएगा। पैनल के सदस्य सभी आवश्यक बातों को ध्यान में रखकर पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए निर्देश तैयार करेंगे।




कैसे करें भाषा का प्रचार-प्रसार : सम्मेलन के दूसरे सत्र में साहित्यकारों को छत्तीसगढ़ी भाषा के प्रयोग व विकास के लिए विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण भी दिया। भाषा के विकास के लिए जिन महत्वपूर्ण बिंदुओं को ध्यान में रखना चाहिए, उस पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की। विशेषज्ञों में भाषाविद डॉ. चितरंजन कर ने कहा कि एक अनपढ़ व्यक्ति भी प्रदेश में छत्तीसढ़ी बोलता है। इसलिए जन-जन तक अपनी बातों को पहुंचाने का यह एक सशक्त माध्यम है।



अन्य विशेषज्ञों में पालेश्वर शर्मा और डॉ. राधेश्याम दुबे ने भी छत्तीसगढ़ी के कई बिंदुओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के तीसरे सत्र में कुछ साहित्यकारों ने छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास के लिए अपने-अपने विचार रखे। इनमें डॉ. रामनाराण शुक्ल, डॉ. बलदेव साव, बलदेव भारती, शैल शर्मा एवं डॉ. नलिनी श्रीवास्तव ने अपने आलेख का वाचन किया।

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