गांवों से निकलेगी विकास की गंगा
रायपुर. नई औद्योगिक नीति 2009 एक तरह से हसीन सपनों की तरह है। यह कागजों से बाहर आ जाए और मूर्त रूप ले ले तो छत्तीसगढ़ में औद्योगिक क्रांति आ जाएगी। उद्योगों का परिदृश्य ही बदल जाएगा। नई नीति पर शुक्रवार को कैबिनेट ने मुहर लगाई है इसमें ‘ऑलराउंड डेवलपमेंट’ का कांसेप्ट समाया है।
नई नीति में चमचमाती सड़कों, रेल कारीडोर, हवाई सुविधाओं, बिजली, पानी, शिक्षा में तकनीक को प्राथमिकता से शामिल करने से लेकर क्या कुछ नहीं है। सबसे बड़ी बात यह कि इन सभी का इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने के बाद उद्योग लगाने की शुरूआत की जाएगी। इन सबके लिए करीब साढ़े पच्चीस हजार करोड़ रुपए से भी अधिक का प्रावधान करने की योजना है।
केवल पर्यावरण संतुलन के लिए 30 से 35 करोड़ रुपए रखे जाएंगे। दावा किया गया है कि यह किसी भी राज्य से सर्वाधिक है। नई नीति पर भरोसा करें तो धुआं उगलने वाले उद्योगों को नागरिकों की जान की कीमत पर अनुमति नहीं दी जाएगी। हरे-भरे वनों की कटाई की कीमत पर भी उद्योगों को स्थापित नहीं किया जाएगा। सूबे में फिलहाल 44 फीसदी वन हैं और यह प्रतिशत अधिक नहीं तो कम भी नहीं किया जाएगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस सबसे महत्वपूर्ण - गोयल :
कंफिडरेशन आफ इंडियन इंडस्ट्री की छत्तीसगढ़ स्टेट काउंसिल के चेयरमेन वीरेंद्र गोयल ने नई औद्योगिक नीति को पारदर्शी बताते हुए कहा कि सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस किया गया है।
यहीं किसी भी इंडस्ट्री की डिमांड होती है। जिलों की बजाए पिछड़े ब्लाकों पर फोकस करने का सुझाव भी सीआईआई का ही था। सीमेंट, स्टील व पावर में एक्सपोजर कम करने पर उद्योगपति सहमत नहीं होंगे। अच्छा होता कि उपलब्ध संसाधनों वाले उद्योगों को प्रमोट करने और उन्हें वैल्यू एडिशन या अपग्रेड करने की बात होती।
छत्तीसगढ़िया सवरेपरि
छत्तीसगढ़ियों के हित का भी व्यापक तौर पर ख्याल रखा गया है। जमीन बेचने किसानों को भटकना नहीं पड़ेगा। सरकार ने जमीन के अनुसार 10 लाख, 7.50 लाख और 5.50 लाख रुपए प्रति एकड़ कम से कम रेट तय कर दिए हैं। खास यह कि जरूरतमंद उद्योगपतियों को सरकार जमीन खरीद कर देगी। भूमि अधिग्रहण के लिए राज्य व जिला दफ्तरों को अधिक सक्षम बनाया जाएगा। कारखानों में स्थानीय अकुशल श्रमिकों को 90 प्रतिशत पदों पर, कुशल श्रमिकों को 50 और प्रशासकीय व प्रबंधकीय के एक तिहाई पदों पर स्थानीय लोगों को रोजगार देना होगा।
खास बातें
जिलों की बजाए पिछड़े ब्लाकों में उद्योगों की स्थापना, आदिवासी जिलों पर फोकस
प्राथमिकत, इन्हें 10 प्रतिशत और एक साल की ज्यादा छूट
> कारखानों में वाटरहार्वेस्ंिटग अनिवार्य, एनर्जी सेल कंपलसरी
> रिहेबिटेशन प्लान पर अमल के लिए मॉनीटरिंग, उद्योगों की समस्याओं की सीएम-सीएस लेवल पर समीक्षा
> नोडल अधिकारी नियुक्ति होगी, समस्या निराकरण के लिए, अधोसंरचना में निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन
> निर्यात को प्रोत्साहन, देशी-विदेशी निवेशकों को प्रोत्साहन
> इंजीनियरिंग कालेजों, पालिटेक्निकों व आईटीआई में उद्योग अनुकूल कोर्स को प्राथमिकता,
> नए उद्योगों के पहले नई सड़कें, पुरानी सड़कों का उन्नयन व राष्ट्रीय मार्गो से कनेक्टिविटी
> कॉमन रेल कारीडोर में पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप को प्रोत्साहन, पहली दफे नोटिफिकेशन के साथ जारी










