सात इंजीनियरों के ठिकानों पर छापे
ग्वालियर. आर्थिक गड़बड़ियों से घिरी जलसंसाधन विभाग की हरसी हाईलेवल नहर परियोजना के 7 इंजीनियरों के दफ्तर व आवासों पर आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने शनिवार की सुबह छापे मारकर लगभग 10 करोड़ की सम्पत्ति का पता लगाया है।
छापा मारने में ब्यूरो की 9 टीमें लगाई गईं थीं, और देर रात तक अघोषित संपत्ति के दस्तावेज तलाश करने का काम चलता रहा। ब्यूरो के अधिकारियों के अनुसार, संपत्ति का वास्तविक मूल्यांकन एक-दो दिन बाद जांच पूरी होने पर ही हो सकेगा।
दो स्थानों पर साढ़े चार लाख रुपए की नकदी भी मिली है। जानकारी के अनुसार, ब्यूरो की 9 टीमों ने सुबह पांच बजे इंजीनियरों के घरों पर एकसाथ छापे की कार्रवाई शुरू की। ये छापे ग्वालियर शहर, डबरा, दतिया तथा करैरा (शिवपुरी) समेत 11 ठिकानों पर छापे मारे गए।
कार्रवाई में ईओडब्ल्यू के ग्वालियर व जबलपुर के एसपी क्रमश: ओपी मित्तल व अशोक गोयल शामिल थे। छापे की कार्रवाई को अंजाम देने के लिए भोपाल तथा जबलपुर से भी ब्यूरो के अधिकारी व इन्स्पेक्टरों को बुला लिया गया था।
एक टीम ने थाटीपुर में ज्योति नगर स्थित कार्यपालन यंत्री बरजोर सिंह यादव के चार मंजिला निवास पर छापा मारा जहां प्रारम्भिक तौर पर दस्तावेजों से पता चला कि श्री यादव का दर्पण कॉलोनी में एक मकान, थाटीपुर में एक प्लॉट तथा लखनोती खुर्दग्राम में छह बीघा जमीन है।
इस भूमि में रिटायर्ड मुख्य अभियंता एचडी जोशी भी पार्टनर बताए गए हैं। श्री यादव के यहां 3 लाख रुपए नकद एवं 4 करोड़ रुपये की संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं, एक लाकर होने का पता चला है जो सोमवार को खोला जाएगा।
राजघाट परियोजना से सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता एचडी जोशी के आंग्रे साहब का बाड़ा स्थित आवास पर छापा मारने गई टीम को वहां कोई नहीं मिला। श्री जोशी इंदौर गए हुए हैं, उनके मकान में ताला लगा था। ब्यूरो के अधिकारियों ने मकान को सील कर श्री जोशी को जानकारी से अवगत कर दिया, साथ ही उन्हें तुरंत ग्वालियर आने को कहा।
परियोजना के कार्यपालन यंत्री सीएम मिश्रा के सी-9 विवेक विहार स्थित आवास से ब्यूरो की टीम को लगभग 35 लाख रुपए तथा कार्यपालन यंत्री राजेश श्रीवास्तव के डीडी नगर स्थित आवास से डेढ़ लाख रुपए नकद व लगभग 60 लाख रुपए की संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं।
जल संसाधन विभाग के एसडीओ उदय लाले के हरीशंकर पुरम स्थित दो मंजिला मकान पर छापे में लगभग 70 लाख रुपए की सम्पत्ति होने के प्रमाण मिले हैं। हरीशंकपुरम में ही एसडीओ आरके नाहर के आवास पर लगभग 60 लाख की सम्पत्ति के दस्तावेज मिले हैं।
इन सभी स्थानों पर रात तक अघोषित अन्य संपत्ति के दस्तावेज ढूंढने का काम जारी था, इनमें बैंक लाकर, एफडी, शेयर आदि के दस्तावेजों की खास तौर पर तलाश की जा रही है। ब्यूरो सूत्रों ने बताया कि फिलहाल दस करोड़ रुपये की संपत्ति का पता चला है। एक-दो दिन बाद जांच पूरी होने पर ही इन इंजीनियरों की आय से अधिक संपत्ति का सही मूल्यांकन हो सकेगा।
चार दफ्तर सील
ब्यूरो की टीम ने शिवपुरी जिले के करैरा स्थित कार्यपालन यंत्री बरजोर सिंह यादव के दफ्तर व सरकारी आवास पर छापा मारा, यहां से कुछ दस्तावेज जब्त करने के बाद दोनों को सील कर दिया। ब्यूरो ने संभाग क्रमांक-2 के गोविंदपुरी स्थित कार्यपालन यंत्री के दफ्तर व संभाग क्रमांक-1 डबरा के दफ्तर व राजघाट परियेाजना दतिया के दफ्तरों को भी सील कर दिया।
यह है मामला
हरसी हाई लेवल नहर परियोजना ग्वालियर में भारी भAष्टाचार की तीन अलग-अलग शिकायतें आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो को मिली थीं। ये शिकायतें परियोजना में 600 करोड़ के घोटाले की थीं। शिकायतों का ब्यूरो के अफसरों ने परीक्षण किया।
इसके बाद शुरुआती तौर पर सही पाए जाने पर दो दिन पूर्व ही भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420,467,468, 471,120 बी, भAष्टाचार निवारण अधिनियम की कुछ धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। इसके बाद ब्यूरो ने विशेष न्यायालय में आवेदन देकर आवास व दफ्तरों में तलाशी का वारंट हासिल किया।
ब्यूरो ने जांच में पाया कि परियोजना के अधिकारियों ने नियमविरुद्ध तरीके से सामग्रियों तथा उपकरणों का क्रय किया तथा इसका भुगतान उन लोगों को मिला जो सामग्रियों के निर्माता या एजेंट भी नहीं थे। प्रथम दृष्टया दस करोड़ रुपये की क्षति शासन को पहुंचाए जाने के प्रमाण ब्यूरो को मिले। प्रकरण में ब्यूरो ने 20 से अधिक इंजीनियरों, वरिष्ठ लेखापाल, ठेकेदार तथा सामग्री सप्लाई करने वाले आरोपी बनाए गए हैं। शासन अब तक 23 अधिकारियों व कर्मचारियों को निलंबित कर चुका है।










