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Sunday, November 08, 2009 11:34 [IST]  

danik bhaskarपावर गैलरी - पुराने अंदाज में अमर

डॉ. भारत अग्रवाल

amarपुराने अंदाज में अमर



अमर सिंह को सिंगापुर में सर्जरी कराकर लौटे करीब एक महीने से ज्यादा हो गया। कांग्रेसियों को हैरानी होने लगी थी कि ऐसा क्या हृदय परिवर्तन हुआ कि वह कांग्रेस पर हमला करने से बच रहे हैं। लेकिन जब पिछले दिनों उन्होंने मायावती के खिलाफ जाने-पहचाने अंदाज में आग उगलते हुए हमला बोला तो कांग्रेस मुख्यालय पर जमा पार्टी नेताओं को एक स्वर से कहते सुना गया - यह तो वही अमर सिंह हैं।



चिदंबरम ने संभाली कमान



जिस दिन राजधानी एक्सप्रेस को पश्चिम बंगाल में बंधक बना लिया गया था, केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम को दोहरे संकट से निपटने की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी। एक ओर तो उन्हें रेल और उसमें सवार यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी पड़ी। दूसरी ओर, उन्हें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य और रेल मंत्री ममता बनर्जी के बीच कोआर्डिनेट भी करना पड़ा, क्योंकि बंगाल के ये दोनों राजनीतिक दिग्गज संकट के समय भी एक-दूसरे से बातचीत तक नहीं करते हैं।



गलत निशाना



देवबंद की घटना के बाद से केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम भाजपा के निशाने पर हैं और उसके हमलों का बखूबी जवाब दे रहे हैं। लेकिन हैरत तो तब हुई जब मुख्य विपक्षी दल ने उन्हें आम आदमी के हितों का खयाल रखे बगैर ‘डायरेक्ट टैक्स कोड’ तैयार करने का दोषी ठहराया। हकीकत यह है कि टैक्स कोड का उनके मौजूदा मंत्रालय से कोई रिश्ता नहीं है, यह वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के अधीन है।



संकट के दिनों में जन्मदिन



मधु कोड़ा के भ्रष्टाचार की सुर्खियों में क्या स्पैक्ट्रम को लेकर उठा विवाद दब जाएगा? कई लोग मानते हैं कि कांग्रेस ने कोड़ा मामले को सोच-समझकर हवा दी है ताकि स्पैक्ट्रम के विवाद से लोगों का ध्यान हट जाए। कांग्रेस के लिए अच्छी बात यह है कि मुख्य विपक्षी दल इस वक्त भीतरी कलह में फंसा है और सत्तारूढ़ दल पर हमला करने की हालत में नहीं है। इस साल लालकृष्ण आडवाणी का जन्मदिन भी कोई खुशखबरी लेकर नहीं आया क्योंकि खुद उनका भविष्य दांव पर है और पार्टी भी अपनी ध्वस्त छवि सुधारने में लगी है।



अपने-अपने खेल



कांग्रेस को विश्वास है कि उसे मधु कोड़ा के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच का झारखंड के चुनावों में खासा लाभ मिलेगा। पार्टी नेताओं को लगता है कि कोड़ा के इन मामलों में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार अजरुन मुंडा और राजद प्रमुख लालू यादव को भी लपेटा जा सकता है। उधर भाजपा ने भी कांग्रेस की चाल का जवाब खोज लिया है। उसे यकीन है कि कोड़ा के भ्रष्टाचार का पैमाना इतना भारी-भरकम है कि कांग्रेस भी इसके फंदे से बच नहीं सकती। अगर लालू का नाम आता है तो वह कांग्रेस के भागीदार तो रहे ही हैं।



अपने रंग में वापस



आर के आनंद लंबे समय बाद अपने रंग में लौट आए हैं। वह पार्टी की ओर से बाबूलाल मरांडी से बातचीत कर रहे हैं। हालांकि केशव राव और मुकुल वासनिक झारखंड के प्रभारी हैं, लेकिन मरांडी के संपर्क में आनंद ही हैं। चुनाव से पहले कांग्रेस ने एक सर्वे किया था जिससे पता चला कि शिबू सोरेन जैसे दागदार नेताओं के साथ का नुकसान पार्टी को उठाना पड़ सकता है, जबकि मरांडी की साफ छवि है। इशारा समझकर आनंद ने तभी मरांडी से संपर्क बढ़ाना शुरू कर दिया ताकि पार्टी में अपनी हैसियत दोबारा हासिल की जा सके।



राजनीति के पुराने खिलाड़ी



भारतीय राष्ट्रीय लोकदल प्रमुख ओम प्रकाश चौटाला ने उम्मीद नहीं खोई है। विधानसभा चुनाव में 30 से ज्यादा सीटें जीतने के बाद वह मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा का खेल बिगाड़ने की तैयारी कर रहे हैं। राज्य में हुड्डा की सरकार बनने से तो नहीं रोक पाए, लेकिन अब वह उन्हीं स्वतंत्र विधायकों पर निशाना साध रहे हैं जिनके समर्थन से हुड्डा सरकार बनाने में कामयाब रहे। वह हुड्डा के तरीकों से ही उन्हें रिझा रहे हैं। राज्य के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, साल भर के भीतर हुड्डा सरकार गिर जाए तो आश्चर्य मत कीजिए।



करुणा का खेल



टेलीकॉम मंत्री ए राजा स्पैक्ट्रम घोटाले को लेकर आरोपों के घेरे में हैं। सीबीआई उनके मंत्रालय पर छापा मार चुकी है। विपक्षी दलों को भी मनमोहन सिंह सरकार को कठघरे में खड़ा करने का मौका मिल गया। लेकिन कांग्रेस उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटाने की स्थिति में नहीं है क्योंकि वह द्रमुक जैसे सहयोगी दल के नेता हैं। सवाल यह है कि कांग्रेस को राजा पर निशाना साधने की ताकत कहां से मिली। चर्चा है कि द्रमुक सुप्रीमो एम करुणानिधि राजा को केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटाना चाहते हैं। यही वजह है कि कांग्रेस उनके खिलाफ मोर्चा खोल सकी।



मीडिया के जाल में



राजनीतिज्ञ मीडिया के जाल में कैसे फंसते हैं, यह हाल ही में संघ प्रमुख मोहन भागवत और भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने दिखा दिया। जयपुर में संघ प्रमुख से मीडिया ने पूछा कि भाजपा को सर्जरी की जरूरत है या मेडिसिन की या कीमोथेरेपी की। बचने के लिए मोहन भागवत ने कहा कि यह पार्टी ही तय करेगी। लेकिन सर्जरी, मेडिसिन, कीमोथेरेपी जैसे शब्दों का प्रयोग उन्होंने अपनी ओर से नहीं किया था। दिल्ली में एक कार्यक्रम के बाद मीडिया वालों ने राजनाथ सिंह से भागवत की कथित टिप्पणी पर प्रतिक्रिया मांगी। पत्रकारों ने भी भागवत का नाम नहीं लिया था। जाहिर है नाराज राजनाथ ने कह दिया कि किसका दिमाग खराब हो गया है जो पार्टी के बारे में ऐसा कह रहा है। सभी अखबारों और टीवी चैनलों ने स्टोरी चला दी - ‘भागवत पर राजनाथ का हमला’।



ढुलमुल रवैया



संघ लोक सेवा आयोग में लंबे अरसे से सदस्य के दो पद रिक्त हैं लेकिन सरकार इसके लिए अभी तक ढुलमुल रवैया अपनाए हुए है। सरकार का यह रवैया शायद केंद्र में कृषि सचिव पी नंदकुमार की जून में होने वाली सेवानिवृत्ति तक चले, क्योंकि वे केरल से संबंधित हैं और संभवत: उन्हें आयोग में सदस्य बनाया जाना है।



विदेशी भाषाओं के कोर्स



अरुणाचल प्रदेश में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है जिसमें जर्मन और फ्रेंच भाषाओं के कोर्स की पीठ हैं। चीन, बर्मा और बांग्लादेश इस राज्य की सीमा पर बसे हमारे पड़ोसी देश हैं और इनकी भाषा ज्यादा लाभकारी हो सकती है। लेकिन विडंबना है कि इन देशों की भाषाओं के कोर्स इस केंद्रीय विश्वविद्यालय में नहीं हैं।

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