Sunday, November 08, 2009 14:48 [IST]  

danik bhaskarसचिन की यादगार पारी से जीता क्रिकेट

अयाज़ मेमन

sachinकीर्तिमान और निजी उपलब्धियों पर नजर रखने वाला संपूर्ण देश इस उम्मीद के साथ सचिन तेंडुलकर की ओर देख रहा था कि वे हैदराबाद में हो रहे अंतरराष्ट्रीय मैच में सात रन बनाकर वन डे में 17000 रन बनाने का रिकॉर्ड बना लेंगे।

उस मैच में उन्होंने 175 रन बनाए और यह सिद्ध कर दिया कि उनकी योग्यता न तो बढ़ती उम्र और न ही इस सीरीज में कम स्कोर के कारण बढ़ रही निराशा की वजह से धुंधली हुई है।

यद्यपि गुजरे हुए पखवाड़े में कुछ दबे-छिपे स्वरों में सचिन की टाइमिंग, फुटवर्क, बैटिंग के क्रम में उनके स्थान को लेकर बहस चल रही थी, लेकिन सचिन ने ऐसी पारी खेली कि बहस बंद हो गई और ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को भी ३५१ रन बनाने का लक्ष्य बचाने में पसीने आ गए।

जहां वीरेंद्र सहवाग ने बहुत धमाकेदार शुरुआत की, वहीं तेंडुलकर ने बहुत सतर्कता और सावधानी के साथ अपनी पारी आगे बढ़ाई। जल्द ही सचिन न सिर्फ मैच का मुख्य आधार, बल्कि सबसे तेज-तर्रार खिलाड़ी बन गए क्योंकि स्ट्रोक प्लेयर युवराज और धोनी सस्ते में आउट हो गए और सहवाग के पीछे-पीछे पैवेलियन का रास्ता पकड़ा। अब या तो तेंडुलकर विजय के लिए भारत का नेतृत्व करते या फिर कोई नहीं करता।

इसके लिए सिर्फ साहस की जरूरत नहीं थी, बल्कि जबर्दस्त कौशल और स्थिति पर नियंत्रण की योग्यता चाहिए थी। जिस तरह से सचिन ने दौड़-दौड़कर एक-एक, दो-दो रन बनाए और कुछ अंतराल पर चौके और छक्के भी लगाते रहे, इसमें जाहिर तौर पर उनका कौशल था। क्षेत्ररक्षकों के बीच में से रन लेने और ऊंचे शॉट लगाकर पास में खड़े क्षेत्ररक्षकों को पीछे भेजने के लिए न केवल सटीक अनुमान, बल्कि गेंदबाजों के मनोविज्ञान की सही समझ भी जरूरी है।

क्या किसी वन डे मैच में किसी भारतीय ने इससे बेहतर कोई पारी खेली है? इसके पक्ष और विपक्ष में गर्मागर्म बहसें होती रहेंगी, लेकिन निश्चित रूप से इस पारी की गणना कुछ सर्वश्रेष्ठ पारियों में की जाएगी।

अगर मुझे सर्वश्रेष्ठ पारियां चुनने को कहा जाए तो मैं इन पारियों को चुनूंगा - सचिन तेंडुलकर द्वारा 1998 में शारजाह में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई 143 रनों और २क्क्३ के वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के खिलाफ 98 रनों की पारी। इसके अलावा कपिल देव द्वारा 1986 में वेल्स में जिम्बाव्बे के खिलाफ खेली गई 175 रनों की पारी, जो भारत के वर्ल्ड कप जीतने के लिए बहुत महत्वपूर्ण थी।

यह सिर्फ एक संयोग है कि दोनों के स्कोर समान हैं, लेकिन 26 साल पहले टनब्रिज वेल्स में कपिल देव की पारी और गुरुवार को खेली गई सचिन तेंडुलकर की पारी में बहुत समानताएं हैं, जो अपनी आक्रामकता, साहस और एक कठिन स्थिति का चुनौतीपूर्ण ढंग से सामना करने में कहीं कम नहीं है।

यद्यपि कपिल देव ने जिम्बाव्वे के खिलाफ ये पारी खेली, लेकिन फिर भी मैं इसे बेहतर इसलिए मानूंगा क्योंकि जब वे खेलने आए, उस समय परिस्थितियां बहुत कठिन थीं। ९ रन पर चार भारतीय बल्लेबाज आउट हो चुके थे। यही नहीं, वे विशेषज्ञ बल्लेबाज भी नहीं थे और सबसे बड़ी बात कि भारत ने यह मैच जीता था।

यद्यपि तेंडुलकर ने ऑस्ट्रेलिया के कमजोर खेल के खिलाफ १७५ रन बनाए, फिर भी इसके बारे में भी उसी ऊंचाई से बात होनी चाहिए। और किसी भी चीज से ज्यादा इसलिए क्योंकि इसने एक शाम को शानदार क्रिकेट के आनंद से भर दिया और वन डे मैच को जादू से रंग दिया। भारत भले हार गया हो, लेकिन क्रिकेट जीत गया। तेंडुलकर के बगैर वहां तक पहुंचना असंभव था।

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विचार:

ansar ahmed

Thursday, 12th Nov 2009, 8:35
kapi dev ne 1983 world cop me 175 ren banay thi

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