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Monday, November 09, 2009 03:20 [IST]  

danik bhaskarन विरोधी गेंदबाज थके हैं और न ही बल्लेबाज हुड्डा

प्रमोद वशिष्ठ

चंडीगढ़. मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कांग्रेस का बहुमत न आने के बावजूद अपने विरोधियों को आसपास भी नहीं टिकने नहीं दिया। मुख्यमंत्री पद से लेकर मंत्रिमंडल गठन तक वे सोनिया दरबार में अपनी पुख्ता पैठ सिद्ध करने में कामयाब रहे लेकिन यह राजनीतिक मैच अभी जारी है। कई मजबूत गेंदबाजों की गुगली का उन्हें सामना करना पड़ेगा।



यह बात अलग है कि अब तक कि गेंदबाजी में उन्होंने बेहतर बैटिंग से गेंदबाजों का मनोबल गिरा दिया है। मंत्रिमंडल के गठन में उनका हौसला, मजबूरी साफ नजर आए। इससे उनकी चुनौती भरी आगे रणनीति भी साफ नजर आ रही है।



हौसला: मंत्रिमंडल में किरण चौधरी को शामिल न कराकर उन्होंने अपनी ताकत का अहसास कराया। साथ ही सावित्री जिंदल को दरकिनार कर सांसद नवीन जिंदल को विरोधी खेमे का रास्ता देने से नहीं चूके। कुमारी शैलजा की काट के लिए एससी नेता गीता भुक्कल को पहली बार में ही कैबिनेट मंत्री बना दिया। अवतार भडाना के क्षेत्र में महेन्द्रप्रताप का कद ऊंचा कर भडाना से दुश्मनी जारी रखी।



अहीरवाल के प्रभावी नेता राव इंद्रजीत के भाई यादवेन्द्र को कोई पद नहीं दिया जबकि उस क्षेत्र के तीन कांग्रेसी विधायकों को झंडी लगी कार दी। अपने सखा विनोद शर्मा, संपत सिंह, रघुबीर कादियान, बलबीर शाह सरीखे नेताओं को मंत्रिमंडल से दूर रखने की हिम्मत दिखाई। भजनलाल की हजकां को उनकी शर्त पर कांग्रेस के साथ नहीं आने दिया ।



मजबूरी: सात निर्दलीयों को मंत्री बनाना हुड्डा की मजबूरी रही है। हजकां का समर्थन मिलता तो शायद कुछ निर्दलीय बाहर बैठ सकते थे। वे कहते आ रहे थे कि निर्दलीय विधायकों को बिना शर्त शामिल किया है लेकिन सभी सात निर्दलीयों को झंडी लगी कार देनी पड़ी। बताते हैं कि ओपी जैन कैबिनेट पद पर अड़े रहे जबकि सुखबीर कटारिया मुख्य संसदीय सचिव पद पर नहीं मानें।



नौ मंत्रियों में चार निर्दलीयों को जगह देनी पड़ी। गोपाल कांडा को राज्यमंत्री बनाया लेकिन विभाग गृह व उद्योग जैसे बड़े देने पड़े। बताते हैं कि शेष निर्दलीय मुख्य संसदीय सचिव से कम बात नहीं कर रहे थे, ऐसे में सीनियर कांग्रेस विधायकों की प्रतिष्ठा रखने के लिए सभी को मुख्य संसदीय सचिव बनाना पड़ा।



चुनौती : कमजोर मंत्रिमंडल के सामने मजबूत विपक्ष से जूझना हुड्डा की मजबूरी है। देखा जाए तो उनके मंत्रिमंडल में अजय सिंह यादव, रणदीप सुरजेवाला व महेन्द्रप्रताप ही पुराने खिलाड़ी नजर आते हैं। विपक्ष ने पहले सत्र में ही बता दिया कि वह ताबड़तोड़ हमलों के लिए तैयार है। अब उन्हें डिफेंस के लिए खुद ज्यादा जूझना होगा। मंत्रिमंडल में नए खिलाड़ियों को गणित समझने में देरी लगेगी।



कई मंत्रियों को ऐसे महत्वपूर्ण विभाग दिए हैं कि वे विधानसभा में बड़ी तैयारी के बाद ही विपक्ष के सामने टिक पाएंगे। विपक्ष में इनेलो व भाजपा में एक से एक खिलाड़ी मौजूद है। पहले सत्र में उनको संभालना विधानसभा अध्यक्ष को भारी पड़ रहा था। इसके अलावा कुमारी शैलजा के संसदीय क्षेत्र से एक भी मंत्री नहीं बनाया। बीरेंद्र सिंह, इंद्रजीत सिंह, किरण चौधरी पहले ही तीर चलाने को तैयार हैं।



किरण चौधरी नेता रविवार को भिवानी में समर्थकों से इस बात पर हाथ खड़े कराए कि ‘मेरे साथ लट्ठ उठाने को कौन तैयार है’ये पता नहीं कि वे किसके लिए लट्ठ उठवा रहीं है। बीरेन्द्र सिंह को सोनिया गांधी ने राज्य की समन्वय समिति का डिप्टी चेयरमैन बना कर हुड्डा के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है।



प्रदेशाध्यक्ष बनाएंगे ब्राrाण नेता को



माना जा रहा है कि हुड्डा प्रदेशाध्यक्ष पद पर अपने खेमे किसी ब्राrाण नेता को प्रदेशाध्यक्ष पद दिलाएंगे, इससे सत्ता व संगठन के बीच संतुलन बना रहे। इनमें विनोद शर्मा व कुलदीप शर्मा हो सकते हैं। इस पद पर राव इंद्रजीत सिह का नाम चल रहा था लेकिन हुड्डा ने तीन यादव विधायकों को झंडी लगी कार दे दी, इससे जातिगत समीकरण बिगड़ गया।



उनका प्रयास रहेगा कि राज्यसभा की रिक्त सीट अपने खेमे में बनी रहे। मंत्रिमंडल के शेष चार पदों पर वे अपनी पकड़ बनाने का प्रयास करेंगे। पहला प्रयास रहेगा कि हजकां के विधायकों को थोड़ी अपनी-थोड़ी उनकी शर्तो पर साथ ले लें।

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