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Monday, November 09, 2009 14:57 [IST]  

danik bhaskarबाण सागर परियोजना के नाम पर लूट

कुमार अरूण

Irrigation Janadesh मिर्जापुर. जनपद में बाण सागर सिंचाई परियोजना में व्याप्त लूट खसोट एवं अनियमितताओं के चलते उत्तर प्रदेश ,मध्य प्रदेश व बिहार, सरकार की यह महत्वपूर्ण परियोजना जहां फाइलों में सिमट कर दम तोड़ रही है वहीं अधिकारियों की उदासीनता से तीन सौ करोड़ रूपये की लागत की इस परियोजना की लागत बढ़कर एक हजार करोड़ रूपये तक पहुँच चुकी है।



उप्र, मप्र व बिहार द्वारा सोन नदी के पानी के उपयोग के लिए हुए 16 सितम्बर 1976 के बटवारे के अनुसार सौ मिलियन एकड़ पानी उत्तर प्रदेश के हिस्से में आता है। जिसके लिए योजना के अनुसार बाण सागर पोषक नहर द्वारा पानी उत्तर प्रदेश में लाकर अदवा नाले से अदवा जलाशय, अदवा मेजा, 25.3 किलोमीटर लिंक नहर द्वारा मेजा जलाशय से 75 किलोमीटर लम्बे जरगो जलाशय तथा जरगो हुसैनीपुर लिंक नहर द्वारा 13.20 किलोमीटर हुसैनीपुर जलाशय में पानी आपूर्ति की जायेगी।

इसके कुल नहरों की लम्बाई 185.48 किलोमीटर है। इस योजना के प्रारम्भ होने पर जनपद में सिंचाई की तीव्रता 85 प्रतिशत से बढ़कर 150 प्रतिशत हो जावेगी तथा 75 हजार 309 हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन की सिंचाई की जा सकेगी। परियोजना के मुताबिक दावा किया गया है कि 1 अक्टूबर से 28 मई के बीच जलापूर्ति किये जाने से भूगर्भ जल स्तर में 27 मीटर की वृद्धि होगी। योजना के निर्माण कार्य में भारी पैमाने पर सभी मानकों को ताक पर रखकर बाण सागर सिंचाई परियोजना के अभियन्ता कार्य की गुणवŸाा से दूर हट कर परियोजना के धनराशि को फाइलों में चाक चैबन्द दिखा बन्दरबाट में लगे हैं।



अदवा बैराज लिंक नहरों के निर्माण में तो काम कम बंदरबाट ज्यादा हो रहा है। यहां के सभी प्रस्तावों में दो गुना से ज्यादा खर्च शामिल कर लिया गया है। मजे की बात यह है कि प्रस्ताव में जो काम दिखाया गया है वह मौके पर काम हुआ ही नहीं है और उसका भुगतान भी हो चुका है। परियोजना के निर्माण के लिए आयी सीमेण्ट, सरिया खुले बाजार में धडल्ले से औने पौने दामों में बेची जा रही है। इस सम्बन्ध में थाना मड़िहान, हलिया व लालगंज पुलिस द्वारा आधा दर्जन लोगों के विरूद्ध विगत छः महीने में प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है।



कई ट्रक सीमेण्ट व सरिया भी जब्त किये जा चुके है। स्थानीय निवासियों की माने तो अभियन्ताओं एवं पुलिस की मिली भगत पर लगातार कई ट्रके सीमेण्ट और सरिया बाजारों में भेजे जाते है। जिसमें पुलिस से साठ-गाठ नहीं हो पाती वही सीमेण्ट सरिया जब्त होता है अथवा प्राथमिकी दर्ज की जाती है।



बाण सागर सिंचाई परियोजना मिर्जापुर के अभियन्ताओं के शानोशौकत व कालोनी परिसर पर दृष्टि डाली जाये तो लगता है यह कोई सरकारी कर्मचारी का कार्यालय न होकर धनसम्राट कुबेर की गद्दी बन गया है। जो आयकर विभाग के पैनी दृष्टि में भी खासा धूल झोकने में सफल हो रहा है।



जनपद की इस महत्वपूर्ण परियोजना का लाभ जिले के जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते लोअर खजुरी जलाशय, अपर खजुरी जलाशय एवं ढेकवा जलाशय को परियोजना के नक्शे से बाहर कर दिये जाने के कारण इससे जुड़े विकास खण्ड पहाड़ी एवं विकास खण्ड सिटी के दर्जनों गांव नहरों एवं माइनरों से जुड़े किसानो के लगभग 2523 हेक्टेयर जमीन सिंचाई से वंचित रह जायेगी। वर्तमान में इन जलाशयों के माध्यम से मात्र खरीफ फसल की ही सिंचाई हो पाती है।

बाण सागर सिंचाई परियोजना के लक्ष्य को पूर्ण होने की जो समय सीमा निर्धारित है वह मात्र आठ महीने ही शेष है। कार्य अब तक किसी जलाशय लिंक नहर से नहीं जुट सका है जो कार्याें में हो रहे अनियमितता एवं भ्रष्टाचार की प्रत्यक्ष कहानी बयाँ कर रहें है।

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