इसी माह आ सकती है सब्सिडी पर रिपोर्ट
चंडीगढ़. पंजाब के वित्तीय हालात को सुधारने के लिए बनी दो सदस्यीय कमेटी अपनी रिपोर्ट नवंबर के अंत तक दे देगी। कमेटी की बैठकें लगातार चल रही हैं, जिसमें किसानों को दी जा रही मुफ्त बिजली को सीमित करने, आबियाना बढ़ाने और शहरों में कुछ टैक्स बढ़ाने जैसे मुद्दों पर एक हद तक सहमति हो गई है। बात केवल यह दरें कितनी लगाई जानी है इसको लेकर अटकी हुई है।
किसानों को निशुल्क बिजली उपलब्ध करवाने के लिए राज्य सरकार इस समय 2812 करोड़ रुपए की राशि खर्च कर रही है। हरियाणा और गुजरात की तर्ज पर राज्य सरकार 60 रुपए प्रति हार्स पावर लगाकर इससे 650 करोड़ रुपए जुटाने के मूड में है जबकि अकाली दल इस बात के लिए बजिद है कि यह राशि 35 रुपए प्रति हार्स पावर से अधिक नहीं होनी चाहिए। भाजपा का कहना है कि पिछली कांग्रेस के कार्यकाल में जब निशुल्क बिजली बंद करके चार्जेस लगाए गए थे तो वह साठ रुपए प्रति हार्स पावर लगाए गए थे। अब दरें पहले से काफी बढ़ गई हैं ऐसे में उस दर से भी कम राशि वसूल करने का ज्यादा लाभ नहीं होगा। यदि कड़वा घूंट भरना ही है तो एक ही बार भर लेना ठीक रहेगा।
भाजपा कोर ग्रुप के सदस्यों का कहना है कि यदि 35 रुपए प्रति हार्स पावर राशि वसूल की जाती है तो यह 350 से 375 करोड़ रुपए से ज्यादा नहीं होगी। दरअसल भाजपा नेताओं का मानना है कि यदि केवल प्रॉपर्टी टैक्स ही लगाया गया तो यह 800 करोड़ से अधिक होगा जबकि राज्य सरकार वैट पर सरचार्ज अलग से लगाना चाहती है जो चुंगी के विकल्प के रूप में होगा। यह राशि लगभग 730 करोड़ बनती है।
भाजपा कभी नहीं चाहेगी कि शहरी वर्ग पर 1500 करोड़ और ग्रामीण वर्ग पर मात्र 350 करोड़ का भार डाला जाए। भाजपा ने अकाली दल पर आबियाना भी 75 रुपए प्रति एकड़ से बढ़ाकर 150 करोड़ करने के लिए दबाव बनाया हुआ है। उधर कांग्रेस के प्रधान महिंदर सिंह केपी प्रदेश की दयनीय वित्तीय हालत के लिए अकाली भाजपा सरकार की नाकामी बताया है।










