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Tuesday, November 10, 2009 03:06 [IST]  

danik bhaskarचार कांग्रेस में, 5वें का फैक्स

प्रमोद वशिष्ठ

MLAचंडीगढ़. भजनलाल की हरियाणा जनहित कांग्रेस के चार विधायकों ने आखिर कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा कर हरियाणा की राजनीति को नया मोड़ दे दिया। हजकां के पांचवें विधायक द्वारा भी समर्थन का फैक्स करने की खबर से कांग्रेसी खेमा गदगद है। पांचवें विधायक के बारे में स्पीकर मंगलवार को फैसला करेंगे। उनका भी सरकार में शामिल होना तय माना जा रहा है।



हजकां के चार विधायकों ने शामिल होने के बाद सदन में कांग्रेसी विधायकों की संख्या 44 हो गई है जबकि निर्दलीय व बसपा के समर्थित विधायक मिला कर यह संख्या 52 जा पहुंची जो बहुमत से 6 ज्यादा है। अभी रिक्त सीट ऐलनाबाद पर चुनाव होना बाकी है। फिलहाल इसे मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की बड़ी जीत माना जा रहा है।



इसी कड़ी में हजकां के पांचवें विधायक धर्मसिंह छोकर ने भी विधानसभा अध्यक्ष को कांग्रेस में शामिल होने का फैक्स भेजने की पुष्टि की, लेकिन उनके बारे में देर रात तक शामिल होने का फैसला नहीं हो सका। अगर पांचवें के शामिल होने पर मोहर लग गई तो कुलदीप बिश्नोई अकेले रह जाएंगे।



कांग्रेस में शािमल होने वाले विधायकों में दादरी से विधायक सतपाल सांगवान, नारनौल से राव नरेंद्र सिंह, हांसी से विनोद भ्याणा व असंध से जिले राम चोचड़ा शामिल हैं। समालखा के विधायक छोक्कर द्वारा फैक्स भेजे जाने तक 6 सदस्यीय हजकां में उनके अलावा कुलदीप बिश्नोई ही बचे थे। चार विधायक शाम 4 बजे विधानसभा अध्यक्ष हरमोहिन्दर सिंह चट्ठा से मिले एवं उनको लिखित पत्र देकर कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा जाहिर की।



अध्यक्ष ने संविधान के अनुसार इन विधायकों को कांग्रेस में शामिल कर लिया। चट्ठा ने पत्रकारों को बताया कि संविधान की धारा 10 ए के अनुसार इन विधायकों को कांग्रेस मंे शामिल होने के लिए उनसे तीन बजे संपर्क किया। इसके लिए दल बनाना पड़ता है, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने आकर कह दिया कि उन्हें कांग्रेस में मर्ज करने में कोई आपत्ति नहीं है। ऐसे में इनको तुरंत स्वीकृति दे दी गई।



उन्होंने बताया कि अब कांग्रेस विधायकों (44, स्पीकर सहित) की समर्थकों सहित संख्या 52 हो गई है। उन्होंने बताया कि किसी दल के दो तिहाई विधायक एक मत होकर दूसरे दल में शामिल होते हैं तो दलबदल कानून लागू नहीं होता।



पांचवें के बारे में स्पीकर फैसला आज



हजकां विधायक धर्मसिंह छोकर ने भास्कर को बताया कि उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को फैक्स पहले ही भेज दिया। जिसमें कांग्रेस में शामिल करने होने का निवेदन किया है। छोकर ने बताया कि वे किसी कारण से चंडीगढ़ नहीं पहुंच सके। उन्होंने कहा कि कुलदीप की नीतियों से परेशान होकर यह कदम उठाया।



इधर, विधानसभा अध्यक्ष हरमोहिन्दर सिंह चट्ठा ने भास्कर को बताया कि उनके निवास पर फैक्स आया हुआ है, कई घंटे पहले नौकर ने सूचना दी थी। वे घर से बाहर हैं इसलिए फैक्स को देख कर स्थिति बता सकते हैं। अगर फैक्स में समय शामिल हुए चार विधायकों के समय से मेल खाया तो शामिल करूंगा, नहीं तो नहीं। देर रात तक चट्ठा घर नहीं पहुंचे थे। अब यह स्थिति मंगलवार को स्पष्ट होगी।



क्या कहा हजकां विधायकों ने



कांग्रेस में शामिल हुए हजकां के चारों विधायकों ने एक स्वर में कहा कि वे हजकां सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई को बार-बार कह रहे थे कि कांग्रेस को समर्थन दे दिया जाए। विधायकों के बार-बार कहने के बावजूद बिश्नोई नहीं मानें। वे कांग्रेस व हजकां के बीच हो रही बात को विधायकों से छिपा रहे थे। सांगवान ने कहा कि बिश्नोई की दोस्ती इनेलो सुप्रीमो चौटाला के साथ लगातार बढ़ रही थी, वे चौटाला के साथ जाना नहीं चाहते थे।



सोमवार को चारों विधायकों ने बैठक कर कांग्रेस में शामिल होने के प्रस्ताव का पारित किया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस में शामिल होने के लिए कोई शर्त नहीं रखी है, अगर वे शर्त रखते तो मंत्रिमंडल के गठन से पहले भी कांग्रेस के सामने शर्त रख मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते थे। विधायकों के साथ विधानसभा भवन में मौजूद कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष फूलचंद मुलाना ने कहा कि वे कांग्रेस बिना शर्त अपनी मर्जी से आएं हैं,इनका कांग्रेस में स्वागत है।

मंत्री बनेंगे,शपथ ग्रहण समारोह जल्द



भले ही सभी विधायक बिना शर्त शामिल होने की बात कहते रहे लेकिन ये चारों मंत्री बनेंगे। इनमें सतपाल सांगवान व राव नरेन्द्र सिंह को कैबिनेट एवं विनोद भ्याणा व पं.जिले राम चोचड़ा को राज्यमंत्री बनाया जा सकता है। संभावना है कि जल्द ही शपथ ग्रहण समारोह होगा। मंत्रिमंडल में चार पद ही बाकि हैं। इसके बाद मंत्रिमंडल में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के लिए कोई जगह नहीं बचेगी।



क्या है नियम



कानून विशेषज्ञों की राय में किसी भी दल के दो तिहाई विधायक मर्ज कर सकते हैं। इससे पूर्व संबंधित विधायकों के दल को एक बैठक करनी होती है। उसमें निर्णय होता है। पार्टी छोड़ने से पहले पार्टी अध्यक्ष को नोटिस देना पड़ता है। उसमें मतभेद के कारण बताने पड़ते हैं। ऐसी कड़ी प्रक्रियाओं से गुजरने बाद दो तिहाई बहुमत मर्ज कर सकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि जो ऐसी कार्रवाई करता है, सोच-समझ कर ही करता है।

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