मातृत्व सुख भी छीन सकती हैं शहर की ये सड़कें
लुधियाना. जिन महिलाओं की कोख में उनके ‘सपने’ पल रहे हैं, उनसे हमारा अनुरोध है शहर की सड़कों से संभलकर गुजरें। टूटी सड़कें और उनमें पड़े गड्ढे आपके ‘सपने’ को लील सकते हैं। यह बात कोरी नहीं है, बल्कि शहर के गायनाकॉलोजिस्ट इससे सहमत हैं।
शहर की उबड़-खाबड़ सड़कें सिर्फ आपके- हमारे लिए ही खतरनाक नहीं बल्कि उनके लिए भी जानलेवा साबित हो सकती हैं, जिन्होंने अभी दुनिया में कदम ही नहीं रखा। गर्भवती महिलाओं के लिए टूटी सड़कों के झटके कई ऐसी परेशानियां पैदा कर सकते हैं, जिससे गर्भपात की नौबत तक आ जाती है।
ऐसा खतरा रिक्शा, टू-व्हीलर और ऑटों में सफर करने वाली गर्भवती महिलाओं को ज्यादा है। दैनिक भास्कर की लाइव रिपोर्टिग टीम ने सोमवार को शहर की सड़कों का जायजा लिया। हाल ही में निगम ने शहर की मुख्य सड़कों का निर्माण तो करवा दिया, लेकिन हमें ऐसी कई सड़कें टूटी या गड्ढों भरी मिलीं जो लिंक सड़कों का काम करती हैं। ऐसी सड़कों पर आवाजाही की कम नहीं है। कई सड़कें तो ऐसी मिलीं जिनके आसपास आबादी भी काफी थी। लोगों का रोजाना आना जाना भी लगा रहता है। हम गिल चौक की ओर से हरनाम सिंह मक्कड़ रोड पर पहुंचे। वहां की हालत किसी से छिपी नहीं है।
रोड की हालत देख हमने लुधियाना आयरन ट्रेडर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों से बातचीत की। प्रधान संदीप अग्रवाल, कैशियर तरुण गुप्ता, महासचिव रोहित अग्रवाल, हरीश गुप्ता उप प्रधान ने बताया कि कई महीनों से रोड की हालत खस्ता है। अब तो गड्ढे इतने फैल चुके हैं कि कहीं कहीं सड़क भी दिखाई नहीं देती। उन्होंने कहा रोड के हालात से निगम अधिकारियों का वाकिफ करवाया जा चुका है, लेकिन कोई सुधार नहीं।
हमने गिल चौक के आसपास की सड़कों का मुआयना किया। फ्लाईओवर बनने के कारण मुख्य सड़क के ट्रैफिक का दबाव आसपास की सड़कों पर पड़ा है। इनमें से कई सड़कें हमें खस्ताहाल में मिली। ऐसा ही हाल मिलरगंज, निरंकारी मोहल्ला, इंडस्ट्रियल एस्टेट में भी देखने को मिला। शहर के अंदरुनी हिस्सों की बात करें तो चौक डिवीजन नंबर तीन से ख्वाजा कोठी, पुरानी चुंगी से बाबा थान सिंह चौक, गौशाला रोड, इस्लामिया स्कूल रोड, सकरुलर रोड, शिवपुरी रोड, दरेसी और आसपास की सड़कों की दशा भी खराब है।
हालांकि कुछ सड़कों पर निगम न काम भी शुरू करवाया है, लेकिन उसमें देरी लोगों को परेशानी में डाल रही है। इसके अलावा अर्बन एस्टेट दुगरी के लोग भी अच्छी सड़क पर वाहन दौड़ाने के ख्वाब अर्से से संजोए हुए हैं।
गायनाकॉलोजिस्ट की सुनिए
दीप अस्पताल की गायनाकॉलोजिस्ट डा. मनप्रीत कौर का कहना है कि गर्भकाल के दौरान पहले और आखिरी तीन महीनों में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत रहती है। इस दौरान खराब और टूटी सड़कों से गुजरना अजन्मे शिशु के लिए घातक हो सकता है। ऐसे में कई बार मिस कैरेज भी हो जाता है। ऐसे केस उनके पास आए भी हैं। उनके पास ऐसे केस भी आए हैं, जिनमें झटकों के कारण गर्भवती महिलाओं को बाद में परेशानी उठानी पड़ी है।
गुरु तेग बहादुर अस्पताल की गायनाकॉलोजिस्ट डा. नीलम सोढ़ी का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को ज्यादा नुकसान बड़े गड्ढों और खुले मेनहोल से हो सकता है। इनसे निकलने के दौरान तेज झटका लग सकता है, जिनसे गर्भवती महिलाओं को समय से पहले ही डिलीवरी पेन शुरू हो जाती है। गर्भ में बने वाटर बैग को भी नुकसान हो सकता है, जिससे गर्भपात तक की नौबत भी आ जाती है। जिन महिलाओं के पेट में जुड़वा बच्चे हैं उन्हें तो वैसे भी झटकों से बचे रहने की सलाह दी जाती है।
लॉर्ड महावीर होम्योपेथिक कॉलेज की गायनाकॉलोजिस्ट डा. ललित चौधरी भी सड़कों की खराब हालत की वजह से उन से गुजरने वाली गर्भवती महिला और अजन्मे शिशु को नुकसान होने की संभावना से इनकार नहीं करतीं। झटकों से गर्भ को नुकसान उठाना पड़ सकता है। सड़कों पर गड्ड़ों की वजह से लगने वाले तेज झटकों के कारण कई बार गर्भवती महिलाओं को कंपलिकेशन आ जाते हैं, जिससे उन्हें अस्पताल में दाखिल भी होना पड़ता है। उनकी सलाह है कि टूटी और गड्ड़ों वाली सड़क से गर्भवती महिलाओं को निकलने से परहेज करना चाहिए।











