पंजाब की 35 फीसदी आबादी पीती है दूषित पानी
चंडीगढ़. राज्य के 35 फीसदी लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा वर्ष 2009 में 30 सितंबर तक लिए गए कुल 6957 सैंपलों में से जिन 6514 सैंपलों के नतीजे आए हैं उनमें से 2360 फेल हैं। जबकि 443 सैंपलों के नतीजे अभी आने शेष हैं। इन आंकड़ों से सिद्ध होता है कि पंजाब सरकार द्वारा लोगों को साफ व शुद्ध पानी उपलब्ध करवाने के लिए किए जा रहे तमाम दावों के बीच राज्य के लोगों का एक तिहाई वर्ग आज भी दूषित पानी पीने को मजबूर है।
जानकारी के अनुसार यह सैंपल स्वास्थय विभाग की विभिन्न टीमों ने सार्वजनिक स्थानों पर स्थित नलों, शहरों व गांवों में जन स्वास्थ्य विभाग की पानी की टंकियों, स्कूलों, ढाबों, रेस्टोरेंटों सहित अन्य स्थानों से लिए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सैंपल फेल होने की स्थिति में उस विभाग के मुखी को इस संबंधी जानकारी देने के साथ साथ इस संबंध में उचित कदम उठाने के लिए कहने के लिए कहा जाता है। इसके बाद कुछ समय बाद उसी स्थान से दोबारा सैंपलिंग भी की जाती है।
कई प्रकार का प्रदूषण
पानी के ये सैंपल कई कारणों से फेल पाए गए हैं। अनक्लोरिनेशन होने के साथ-साथ बैक्टीरिया युक्त होने, फंगस लगी होने व कई अन्य कारण भी जिम्मेदार पाए गए हैं। अनेक स्थानों पर पीने वाला पानी सीवरेज के पानी के साथ मिक्स पाया गया है। इसमें कचरा मिला पाया गया है।
दूषित पानी से लोग मुख्य रूप में डायरिया, टायफाइड, कालेरा, गैस्ट्रोइनटरोटिस, पीलिया सहित अनेक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। पानी के सैंपल फेल पाए जाने वाले विभागों को लिखित जानकारी दी जाती है।
डॉ.दीपक भाटिया डिप्टी डायरेक्टर, स्वास्थय विभाग पंजाब










