आदर्शो पर भारी पड़ता है सच
चंडीगढ़. जिंदगी की दौड़—धूप में भी इंसान आदर्शो का साथ नहीं छोड़ना चाहता लेकिन जीवन का सच एक मोड़ पर हर इंसान के आदर्शो से बंधे रहने की चाहत को मसोस देता है। जागती हुई इस दुनिया में सोते हुए इंसान की इसी कड़वी हकीकत से जुड़े कई सवाल उठाता है पंजाबी नाटक ‘कथा रिढ़दे परिंदे दी’।
चंडीगढ़ थियेटर फेस्टिवल के पहले दिन इस नाटक का मंचन हुआ पंजाब कला भवन सेक्टर-16 में। यह फेस्टिवल भीड़ की बजाय रंगकर्मियों और नाटक के शौकीन दर्शकों को सभागार में एक साथ बैठाकर नाटक दिखाने के मकसद से कराया जाता है। बुधवार को पंजाब कला भवन के सभागार में खड़े होकर भी नाटक देख रहे लोग आयोजकों के इस प्रयास को सार्थक कर रहे थे। नाटक के शुरू होते ही मुख्य किरदार के रूप में लेखक कुछ सियासी सवाल खड़े करता है।
लेखक अपने पाठकों और परिचितों में समानता और आदर्शवाद का मॉडल है। लेकिन जिंदगी का सच लेखक के आदर्शवाद से बड़ा निकलता है। वह समाज में अपनी इज्जत की खातिर बेटी का कत्ल कर देता है। यहीं यह पहलू सामने आता है कि तारीख के तीखे तीरों से कोई नहीं बच पाया। बेटी के कत्ल के बाद लेखक के किरदार ही सवाल पूछने लगते हैं। इन्हीं सवालों के जरिए नाटक कई अहम सच्चईयों को सामले लाता है। फिर सभागार में बैठे दर्शक मंच से उठ रहे समानता, भ्रूण हत्या और महिलाआंे की स्थिति से ताल्लुक रखने वाले सवालों के जवाब खोजने की कोशिश करने लगते हैं।
नाटक का निर्देशन अनीता शब्दीश ने किया। नाटक के संवाद सामान्य सी लगने वाली बातों से दर्शकों की सोच को गहराई तक छूते हैं। मंच और संगीत नाटक का अहम पक्ष रहा। इस पर बेहतर काम हुआ। कई जगह मंच पर किरदार और कलाकार अलग—अलग नजर आए। इस बार का चंडीगढ़ थियेटर फेस्टिवल रंगकर्मी स्वर्गीय हबीब तनवीर को समर्पित है।
थियेटर फेस्टिवल के दूसरे रोज होगा ‘थॉट’
इस नाटक का निर्देशन युवा रंगकर्मी चक्रेश ने किया है। युवा कलाकारों का यह ग्रुप रंगमंच की पारंपरिक शैली और नाटकों के लेखन के साथ कुछ प्रयोग करने से गुरेज नहीं कर रहा। ‘थॉट’ की स्क्रिप्ट भी इस टीम ने खुद तैयार की है। हल्की—फुल्की कॉमेडी के साथ यह नाटक बताता है कि जीवन में हर विचार वैसे ही बनता है, जैसी आपकी जिंदगी है। यह नाटक शाम साढ़े छह बजे शुरू होगा।










