डायबीटीज अब सिर्फ बुजुर्गो की बीमारी नहीं
चंडीगढ़. डायबीटीज अब सिर्फ बुजुर्गो की बीमारी नहीं रह गई है। दुनियाभर में 15 साल से कम उम्र के करीब 70 हजार बच्चे हर साल टाइप वन डायबीटीज के शिकार हो रहे हैं। हालांकि ज्यादातर लोगों को यह बीमारी आनुवांशिक कारणों से होती है, लेकिन बिगड़ता खानपान व शारीरिक तौर पर गलत जीवनशैली इसकी मार बढ़ा रहे हैं।
जीएमएसएच, सेक्टर-16 के मेडिकल ऑफिसर, डॉक्टर एसके भंडारी के मुताबिक खाने में अतिरिक्त वसा व फैट, फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक्स और शराब से डायबीटीज होने की संभावना बढ़ जाती है। एलकोहल से पैंक्रियाज और लीवर पर बुरा असर पड़ता है, नतीजतन हारमोन असंतुलन बढ़ता है और डायबीटीज का खतरा बढ़ जाता है।
बचाव ही बेहतर
पैंक्रियाज ट्रांसप्लांटेशन से डायबीटीज का इलाज संभव है, लेकिन यह सब जगह उपलब्ध नहीं है। रोग हो जाने पर उचित खानपान और दवाओं से ही शुगर का स्तर कंट्रोल में रखा जा सकता है। डॉक्टर भंडारी के मुताबिक एक्सरसाइज, सैर को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर इस बीमारी से बचा जा, इनके साथ-साथ सही खानपान भी बहुत जरूरी है। एक्सरसाइज से ब्लड शुगर का सही स्तर बनाए रखने में मदद मिलती है और शरीर भी इंसुलिन के प्रति ज्यादा संवदेनशील हो जाता है।
कुछ भ्रांतियां
अक्सर लोग मानते हैं कि मिठाई खाने से डायबीटीज होती है। लेकिन, मिठाई छोड़ना इससे बचने की गारंटी नहीं है। यह भी माना जाता है कि सिर्फ मोटे लोग ही इसका शिकार होते हैं। लेकिन, इसका संबंध इंसुलिन से है, इसलिए पतले लोग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि शराब पीने से इससे बचा जा सकता है। लेकिन, इसमें कोई सच्चई नहीं है।










