Thursday, November 12, 2009 02:27 [IST]  

danik bhaskar..तो परिवार जाएगा कोर्ट

संजीव महाजन

चंडीगढ़. ‘जो जांच प्रशासन को क्लीन चिट देने के लिए ही हो रही हो, उससे इंसाफ मिलने की उम्मीद क्या करें? हम अब सोनिया गांधी के दरबार में पेश होंगे और पूछेंगे कि क्या यही इंसाफ है? अगर वहां भी इंसाफ न मिला तो कोर्ट का सहारा लेने से पीछे नहीं हटेंगे।’



यह कहना है प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दौरे के समय सुरक्षा प्रबंधों के चलते पीजीआई के बाहर दम तोड़ने वाले सुमित प्रकाश के भतीजे धीरज वर्मा का। धीरज के मुताबिक उनके चाचा सुमित की मौत की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। पुलिस और पीजीआई सिक्योरिटी के कारण उन्हें पीजीआई की इमरजेंसी तक पहुंचने में करीब दो घंटे का समय लगा, जबकि पुलिस अपनी जांच में सिर्फ आठ-दस मिनट की ही देरी बता रही है।



उनके अनुसार उन्हें पुलिस जांच से शुरू से ही इंसाफ मिलने की उम्मीद नहीं थी। हालांकि इंटेलीजेंस ब्यूरो द्वारा अलग से की जा रही जांच पर उम्मीद थी। धीरज के मुताबिक उन्हें हैरत है कि पुलिस और आईबी एक साथ जांच कर रहे हंै। धीरज के मुताबिक उन्हें पुलिस ने ही गुमराह किया और अब पुलिस ही इसकी जांच कर रही है।



परिजन नहीं कर रहे सहयोग: एसएसपी



एसएसपी सुधांशु शेखर श्रीवास्तव का कहना है कि सुमित के परिजन जांच में उनका साथ नहीं दे रहे। उनके मुताबिक कई बार जांच में शामिल होने के लिए सुमित के घरवालों को बुलाया गया, लेकिन वो नहीं आए। एसएसपी के मुताबिक वीरवार को रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। एसएसपी पहले ही कह चुके हैं कि अभी तक की जांच में सुमित को इमरजेंसी तक पहुंचने में सिर्फ आठ से दस मिनट की देरी सामने आई है। वह भी तब जब पीजीआई में सुमित के परिजन इमरजेंसी की जगह दूसरी बिल्डिंग में पहुंच गए थे।



रिपोर्ट में इस आधार को भी झुठलाया गया कि पीजीआई के गेट पर सुमित दर्द के मारे चीखने लगा और उसकी आंखों से आंसू निकलने लगे। पुलिस का मानना है कि जब सुमित गेट तक पहुंचा, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में एक टीवी चैनल की फुटेज का भी सहारा लिया जा रहा है, जिसके मुताबिक गेट पर सुमित अचेत पड़ा था।



ड्राइवर बिल्ला को साथ लेकर पुलिस ने उन रास्तों को तय किया, जिनसे बिल्ला सुमित को पीजीआई लेकर आया था। इस रास्ते को तय करने में पुलिस को सिर्फ 25 मिनट लगे और करीब 35 मिनट में सुमित सेक्टर 35 के इंद्रजीत अस्पताल से पीजीआई इमरजेंसी पहुंच गया था।



इमरजेंसी गेट पर सवाल



अभी तक की जांच में इस पहलू को सामने नहीं लाया गया है कि प्रधानमंत्री के आने पर इमरजेंसी गेट को बंद रखा गया था या नहीं। पीजीआई प्रशासन दावा कर रहा है कि इमरजेंसी गेट बंद नहीं था, जबकि सुमित के घरवालों का कहना है कि इमरजेंसी गेट से उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया।



कौन है वह गार्ड



अभी तक उस गार्ड को भी सामने नहीं लाया गया है, जो रास्ता भटकने पर पीजीआई की पुरानी ओपीडी से सुमित और उसके घरवालों को साथ लेकर इमरजेंसी तक गया था। सुमित के घरवालों का आरोप है कि उस कांस्टेबल को भी पुलिस ढूंढ नहीं पाई है, जिसने गलत रास्ता दिखाया था।



आज या कल में जांच खत्म हो जाएगी। इसके बाद जांच के सभी पहलुओं को मीडिया के सामने स्पष्ट किया जाएगा। अभी तक की जांच में कोई ठोस लापरवाही सामने नहीं आ रही है।



आरएस घुम्मन, एसपी

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