आज भी मौजूद है हीर-रांझा जैसा प्यार
चंडीगढ़. पंजाब के इतिहास में बहुत सी प्रेम कहानियां शामिल हैं। चाहे वो सोनी-महिवाल हो, मिर्जा-साहिबां, सस्सी-पुन्नु या हीर-रांझा। अपनी मोहब्बत के लिए इन सभी ने लड़ाई लड़ी और एक-दूसरे के लिए जान भी दी। एक ऐसी ही कहानी को ‘हीर-रांझा’ फिल्म में प्रस्तुत कर रहे हैं हरभजन मान और नीरू बाजवा।
ट्राईसिटी कॉलिंग मैगजीन के साथ इस फिल्म ने हरभजन मान और नीरू बाजवा की ड्रेस ऑक्शन करने का फैसला किया है। इस फिल्म में इन दोनों ने जो ड्रेसेज पहनी हैं, उनकी ऑक्शन की जाएगी और इकट्ठा किया पैसा चैरिटी में जाएगा। वीरवार को इस फिल्म से जुड़े अपने अनुभवों के बारे में फिल्म की स्टार कास्ट ने प्रेस क्लब में बताया।
तो प्रेम कहानियों को बनेंगी और फिल्में हरभजन मान ने बताया कि वे इस फिल्म से पहले जितनी भी फिल्में बना चुके हैं, उन सभी में पंजाब के हालात दिखाए गए थे। पहली बार वे एक पौराणिक हस्ती के रूप में दिखेंगे। वे कहते हैं कि काफी पहले से वे ऐसी प्रेम कहानी में एक्टिंग करना चाहते थे, लेकिन छह साल पहले ऐसी फिल्म बनाने के लिए कोई आगे नहीं आया। अब पंजाबी फिल्मों का दौर बढ़ता जा रहा है।
दर्शक नए-नए कॉन्सेप्ट देखना पसंद करते हैं। यह एक जरिया भी है आज की जनरेशन को पहले जमाने के प्यार के बारे में बताने का। बॉलीवुड में इस टॉपिक पर बहुत सी फिल्में बन चुकी हैं, लेकिन पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में यह पहली बार होगा और अगर लोगों ने इस फिल्म को पसंद किया तो आगे भी पुरानी प्रेम कहानियों पर फिल्में बनेंगी। हरभजन ने कहा कि वे खुद को रांझे के किरदार के काफी करीब मानते हैं।
वे कहते हैं, ‘मैं मिर्जा की तरह लड़ाई वाले किरदार नहीं, बल्कि रांझे की तरह बांसुरी बजाने के किरदार में ज्यादा कंफर्टेबल महसूस करता हूं।’ फिल्म की अभिनेत्री नीरू ने बताया कि हीर का किरदार निभाना आसान नहीं था। उनके बारे में काफी रिसर्च की और खुद को वैसा बनाने की कोशिश की है। वैसे नीरू आज भी हीर-रांझे जैसे प्यार में यकीन रखती हैं। वे मानती हैं कि आज की जनरेशन में भी कई लड़कियां ऐसी हैं, जो अपने रांझे के लिए पूरी दुनिया से लड़ जाती हैं।










