Friday, November 13, 2009 02:30 [IST]  

danik bhaskarहरियाली निगल रहे हैं विज्ञापन

कपिल चड्ढा

पंचकूला. महज 15 फीट चौड़े और 30 फीट लंबे एक विज्ञापन के लिए शहर में हरेभरे पेड़ की अगर डाल काट दी जाए तो यह सवाल मुखर हो उठना स्वाभाविक है कि शहर को प्रदूषणमुक्त वातावरण के लिए पेड़ चाहिएं या सरकारी खजाना भरने के लिए विज्ञापन।



वीरवार को एमसी की ‘विज्ञापन ड्राइव’ के चलते से—7/18 के चौक पर हुडा द्वारा मेंटेन की जा रही ग्रीन बेल्ट में बिना सक्षम अथॉरिटी की परमिशन के पीपल के पेड़ पर इसलिए आरी चला दी गई, कि उसकी डाल विज्ञापन के लिए लगाए जा रहे फ्रेम में बाधक बन गई थी।



सुबह करीब 10.30 बजे पेड़ पर चली आरी का मंजर चंडीगढ़ की तरफ जाने वाले कई लोगों ने देखा। इतना ही नहीं, विज्ञापन का होर्डिंग लगाने के लिए बीच सड़क खड़ी की गई क्रेन की वजह से करीब एक घंटा प्रभावित आवाजाही रही। इस दौरान चंडीगढ़ की तरफ जाने वाले वाहन चालक कितने परेशान रहे, यह जानने के लिए कोई अधिकारी मौजूद नहीं था। होर्डिंग लगवा रहे सुपरवाइजर दलजीत सिंह ने कहा कि उसे पता नहीं कि पेड़ काटने की अनुमति ली गई है या नहीं, इस बारे में उनके सीनियर रघुबीर बता सकते हैं।



जब दलजीत ने मोबाइल पर रघुबीर से



बात कराई तो जवाब मिला कि ‘सेलवेल’ कंपनी के मैनेजर शिव धीर बता सकते हैं। जब शिव धीर से बात हुई तो उन्होंने हैरानगी जताई कि 7/18 के चौक पर होर्डिंग लगाने के लिए डाल काट कर पेड़ को नुकसान पहुंचाया गया है। धीर का कहना था कि कोशिश रहती है कि विज्ञापन का होर्डिंग लगाते वक्त किसी पेड़ को नुकसान न हो।



पेड़ काटने की परमिशन के बारे में पूछे जाने पर धीर ने कहा कि कंपनी की तरफ से एमसी के पास एप्लाई कर दिया गया था, परमिशन मिली या नहीं, उन्हें क्लीयर नहीं है। दूसरी तरफ हुडा के एसई (हॉर्टिकल्चर) एच.एस. मलिक का कहना है कि जिस ग्रीनबेल्ट में पेड़ काटा गया, वह जमीन हुडा के अधिकार क्षेत्र में आती है। गौरतलब है कि एमसी के साथ हुए एग्रीमेंट के बेस पर दिल्ली बेस्ड एक प्राइवेट कंपनी इन दिनों शहर में विज्ञापनों के होर्डिंग लगा रही है।



इसके एवज में एमसी को एक साल के अनुबंध के चलते एक करोड़ 8 लाख रुपये मिलेंगे। ऐसे ही दो बड़े होर्डिग सेक्टर-7 में मकान नंबर—976 और 977 के पिछली तरफ भी लगाए गए। दोनों घरों में रह रहे परिवारों का कहना है कि इससे उनकी प्राइवेसी खत्म हो गई है।



क्या कहते हैं नुमाइंदे



एक तरफ तो सरकारी महकमे प्रदूषण से बचने के लिए हरियाली को बढ़ावा देने की दुहाई दे रहे हैं, दूसरी तरफ कमाई के लिए हरियाली को उजाड़ा जा रहा है। विज्ञापन का एक होर्डिंग लगाने के लिए ग्रीन बेल्ट में पीपल के जिस पेड़ की डाल काटी गई, सरासर गलत है।



राम प्रकाश, उपप्रधान, सेक्टर-18 एसोसिएशन



शहर के लिए पेड़ महत्वपूर्ण हैं, न कि विज्ञापन के होर्डिंग यूं तो भारत सरकार प्रदूषण घटाने के लिए पेट्रोल-डीजल चालित वाहनों का विकल्प खोज रही है और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विज्ञापन लगाने के लिए पेड़ों को काटा जा रहा है। एमसी व हुडा अधिकारी सुनिश्चित करें कि हरियाली किसी कीमत पर कम न हो।



वी.के. कपूर, पार्षद



शहर को विज्ञापनों से ज्यादा पेड़ों की जरूरत है। ग्रीन बेल्ट में होर्डिंग लगाना उचित नहीं। प्राथमिकता यही हो कि पेड़ों को नुकसान न हो।



सी.एल. सहगल, अध्यक्ष, एन्वायर्नमेंट सोसायटी



क्या कहते हैं अधिकारी



सेक्टर—18 की ग्रीनबेल्ट में विज्ञापन का होर्डिंग लगाने के लिए पीपल के जिस पेड़ की डाल काटी गई, वह काफी दूर तक फैला है। लिहाजा एक डाल कटने से पेड़ को कोई खास नुकसान नहीं होगा। यह भी सही है कि शहर में होर्डिंग कई जगह बेढंगे भी लगाए जा रहे हैं।



एच.एस. मलिक, एसई (हॉर्टिकल्चर) हुडा

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