Friday, November 13, 2009 02:33 [IST]  

danik bhaskarराज्य में सिर की पहली एंजियोग्राफी

निश्चय कुमार

aरायपुर. प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल आंबेडकर अस्पताल में अब सिर की गंभीर बीमारियों का भी परीक्षण शुरू हो गया है। बालौद के करहीबदर गांव का नवयुवक तोलाराम दिमाग की नस फूलने से लगभग मौत के मुंह में जा चुका था। रायपुर और भिलाई के तमाम डॉक्टरों ने नागपुर-मुंबई जाने की सलाह देकर हाथ खड़े कर दिए।



गरीब परिवार उम्मीद की आखिरी किरण लेकर आंबेडकर अस्पताल पहुंचा। इस तरह की बीमारी में सबसे बड़ी चुनौती मर्ज की पहचान होती है। डाक्टरों को उम्मीद है कि अब मरीज की जान बचाने में परेशानी नहीं होगी। छह हफ्ते बाद मरीज का एमआरआई और सिटीस्कैन होगा। इसके बाद उसकी दोबारा एंजियोग्राफी की जाएगी, तभी वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।



मरीज की जान को वर्तमान में किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं है।तोलाराम (21) के पिता सियाराम बेहद गरीब हैं। उनके पास राजधानी आने तक के लिए पैसे नहीं थे। बड़ी मुश्किल में कर्ज लेकर वे अपने बेटे के साथ यहां पहुंचे। आंबेडकर अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ. राजीव साहू ने प्रारंभिक जांच के बाद एंजियोग्राफी की जरूरत महसूस की।



बिना एंजियोग्राफी के दिमाग में बनी गांठ की साइज और उसकी स्थिति के बारे में पता लगाना मुश्किल था। परेशानी यह थी कि हास्पिटल के न्यूरो विभाग में एंजियोग्राफी के लिए 5 फ्रैंक का कैथेटर नहीं था। डॉ. साहू ने एस्कॉर्ट्स अस्पताल से हार्ट की एंजियोग्राफी करने वाला बारीक कैथेटर मंगवाकर मरीज की एंजियोग्राफी की।



मरीज की जांघ में चीरा लगाकर वहां से कैथेटर को दिमाग की फूली नसों तक पहुंचाया गया। कंप्यूटर मॉनीटर पर गांठ देखने के बाद चिकित्सकों के दल ने ओमिन पेज दवा डाली। फूली नसों की मॉनिटरिंग भी की गई। तत्पश्चात मरीज को 21 नंबर वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।



डॉक्टरों ने बताया कि कि न सिर्फ आंबेडकर अस्पताल बल्कि राज्य में दिमाग की यह पहली एंजियोग्राफी थी। हालांकि विपरीत परिस्थितियों में जांच की गई। डॉक्टरों का कहना है कि आंबेडकर में हाल ही में कैथलेब एंजियोग्रॉफी मशीन लगाई गई है, लेकिन तोलाराम के केस में मशीन उपलब्ध नहीं हो पाई थी।



आंबेडकर के रेडियोलॉजी विभाग में जल्द ही डिजिटल सब्सट्रेक्शन एंजियोग्राम (डीएसएम) मशीन लगने वाली है। इसके बाद न्यूरो सर्जरी के पहले एंजियोग्राफी करने में काफी आसानी होगी। सबसे बड़ी बात यह है कि लोग अब तक ब्रेन हेमरेज को बहुत बड़ी बीमारी मानते हैं। लेकिन अगर मरीज की जांच पड़ताल सही समय पर हो जाए तो बहुत आसानी से उसकी जान बचाई जा सकती है।



मदद की जरूरत : तोलाराम के पिता सियाराम दिहाड़ी मजदूर हैं। 2 अक्टूबर को तोलाराम को सिर में दर्द और उल्टी होनी शुरू हुई। एक महीने तक इलाज कराने के दौरान उनके पास अब दवाई के लिए अधिक पैसे नहीं बचे हैं। परिवार अत्यंत गरीब है इसलिए उन्हें मदद की काफी जरूरत है।

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