मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति को चुनौती दी
चंडीगढ़. हरियाणा में पहली बार बनाए गए 9 मुख्य संसदीय सचिवों (सीपीएस) की नियुक्ति को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। चीफ जस्टिस तीर्थ सिंह ठाकुर व जस्टिस महेश ग्रोवर की खंडपीठ ने इस बारे में एक जनहित याचिका को सुनवाई के लिए दाखिल करते हुए पंजाब के संसदीय सचिवों की नियुक्ति याचिका के साथ ही सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं।
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के वकील जेएस भट्टी की तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया कि सात नवंबर को हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने नौ मुख्य संसदीय सचिवों को पद की शपथ दिलाई है। इनमें अनिता यादव, राव दान सिंह, धर्मबीर, जयबीर बाल्मीकि, जलेब खान, प्रहलाद गिल्लाखेड़ा, रामकिशन फौजी, शारदा राठौर व सुल्तान सिंह का नाम शामिल हैं।
याचिका में कहा गया कि मुख्य संसदीय सचिव का कोई पद ही नहीं होता। ये नियुक्तियां असंवैधानिक हैं। इन नियुक्तियों के जरिए महज राजनीतिक हित साधने का प्रयास किया जाता है। साथ ही सरकारी कोष पर जानबूझकर अतिरिक्त भार बढ़ाया जा रहा है। ऐसे में इन नियुक्तियों को खारिज किया जाए।
पंजाब का मामला विचाराधीन
पंजाब के संसदीय सचिवों की नियुक्ति को लेकर पहले से ही पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका विचाराधीन है। अलग-अलग जनहित याचिकाओं में कहा गया कि ये नियुक्तियां असंवैधानिक हैं। ऐसे में इन्हें खारिज किया जाए। कोर्ट ने इन याचिकाओं को एडमिट कर रखा है।










