हवारा को जेल से भगाने में दो साल की कैद
चंडीगढ़. पाकिस्तानी जासूस आबिद महमूद ने कबूला है कि उसने पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के आरोपी आतंकी जगतार सिंह हवारा को जेल से भागने में मदद की थी।
जिला अदालत ने इसके बाद आबिद को दो साल के कैद की सजा सुनाई है। फिलहाल आबिद बुड़ैल जेल में ही है और जासूसी के आरोप में सजा काट रहा है, जो दिसंबर 2009 में पूरी हो जाएगी। बुड़ैल जेल ब्रेक में मदद करने की सजा उसके बाद शुरू होगी।
आबिद पिछले पांच साल से जेल में है। जिला अदालत में दो गवाहों के बयानों के बाद आबिद ने बुड़ैल जेल ब्रेक में अपना अपराध कबूल लिया। आबिद पर यह भी आरोप था कि उसने हवारा को पाकिस्तान पहुंचाने की योजना बनाई थी। आबिद के वकील अमर सिंह चहल ने बताया कि कोर्ट में उसने अपना अपराध कबूल लिया। अदालत ने उसे दो साल की कैद की सजा सुनाई है। यह सजा जासूसी के सिलसिले में दी गई सजा के बाद ही लागू होने की संभावना है।
आबिद को देश की सुरक्षा से जुड़े अहम दस्तावेज व नक्शे बाहर भेजने और जासूसी के केस में जिला अदालत ने मार्च, 2009 में सात साल की सजा सुनाई थी। इस केस में आबिद 2003 से जेल में था और उसे इस साल दिसंबर 2009 में जेल से रिहा होना था। पुलिस ने 24 फरवरी 2003 को आबिद को जासूसी के आरोप में सेक्टर 34 स्थित पासपोर्ट ऑफिस के पास से गिरफ्तार किया था।
आबिद के साथ ही मोहम्मद आरिफ भी पकड़ा गया था। पुलिस को सूचना मिली थी कि आबिद किसी पाकिस्तानी को भारत की सुरक्षा से संबंधित दस्तावेज सौंपने जा रहा है। पुलिस को आबिद के पास से हाथ से बने दो नक्शे, कुछ पर्चियां, जिन पर रक्षा अधिकारियों के नाम व रैंक का ब्यौरा था, मिला था। आबिद के पास से नॉर्दर्न कमांड और अंबाला कैन्टोन्मेंट क्षेत्र के नक्शे भी बरामद किए गए थे।
निहाल चौहान रखा था नाम
आबिद भारत में निहाल चौहान के नाम से रह रहा था। घर से बरामद दस्तावेजों में आबिद का नाम निहाल और उसके पिता का नाम मंगल चौहान लिखा था। उसका पता भी बुड़ैल का ही था, जबकि सच्चई यह है कि आबिद पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का निवासी है। आबिद कंप्यूटर सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। उसके पिता फैसलाबाद एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर थे। आबिद को 6 साल पहले गिरफ्तार किया गया था।










