Friday, November 13, 2009 02:56 [IST]  

danik bhaskarफर्जी इंस्टीट्यूट और जाली सर्टिफिकेट

संजीव महाजन

चंडीगढ़. दीपिका ने सेक्टर-46 के एक इंस्टीट्यूट से 11वीं और 12वीं की। 12वीं में पास भी हो गई और पंचकूला के सरकारी कॉलेज में मास कम्युनिकेशन में दाखिला भी ले लिया। यहां तीन महीने पढ़ाई के बाद पता चला कि उसका 12वीं का सर्टिफिकेट नकली है। उसे कॉलेज से निकाल दिया गया है।



दीपिका अकेली नहीं है जो इस धांधली का शिकार हुई है। उसी की तरह 200 से ज्यादा विद्यार्थी फर्जी सर्टिफिकेट के जाल में फंसकर अपना वक्त और पैसा बरबाद कर चुके हैं। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से संबद्ध पंचकूला के सरकारी कॉलेज में तीन महीने तक मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई करने के बाद दीपिका को कॉलेज से निकाल दिया गया। बताया गया कि उसने 12वीं का जो सर्टिफिकेट जमा कराया है वह फर्जी है।



यह सर्टिफिकेट बोर्ड ऑफ हायर सेकेंडरी एजूकेशन, दिल्ली के नाम से जारी हुआ है। परीक्षा केंद्र वृंदावन गुरुकुल, छलेरा नोएडा बताया गया है। सर्टिफिकेट मंे कंट्रोलर ऑफ इग्जामिनेशन के हस्ताक्षर भी फर्जी हैं। इसके बाद दीपिका उस इंस्टीटच्यूट में पहुंची, जहां से उसने 12वीं की थी। आरोपी इंस्टीटच्यूट संचालक अजय ने उसे बताया कि वह खुद ठगी का शिकार हो गया है।



पुलिस को शिकायत न दे, नहीं तो दोनों मुसीबत में फंस जाएंगे। वह उसकी फीस लौटा देगा। अब दीपिका असमंजस में है कि क्या करे। अपने करिअर को लेकर आशंकित दीपिका अब कुछ कहने से भी घबरा रही है। उसने मनीमाजरा के एक स्कूल में 12वीं में दाखिला लिया है। बोर्ड ऑफ हायर सेकेंडरी एजूकेशन, दिल्ली के मुताबिक चंडीगढ़, मोहाली, खन्ना और पटियाला के करीब 200 बच्चों ने इस धांधली की शिकायत दी है। बोर्ड के मुताबिक वह पब्लिक नोटिस भी चस्पां कर चुकी है कि दाखिला लेने से पहले जांच लें, ताकि इस तरह के इंस्टीट्यूट्स के झांसे में आने से बचा जा सके।



फेल-पास का खेल भी



इस छोटे से इंस्टीटच्यूट में हजारों का खेल चल रहा है। ऐसे इंस्टीटच्यूट अखबारों में सीधे दसवीं और बारहवीं पास कराने का झांसा देते हैं। बच्चों को कोई रसीद नहीं दी जाती। पेपर के वक्त एक प्राइवेट स्कूल और उसके टीचर को हायर किया जाता है। बोर्ड के पेपर के वक्त ही पेपर कराए जाते हैं। बच्चों का रिजल्ट खुद तैयार किया जाता है।



पढ़ाई में कमजोर बच्चों को पास कराने के नाम पर भी पैसे ऐंठे जाते हैं। दीपिका के साथ भी ऐसा ही हुआ। सेक्टर 26 के एक प्राइवेट स्कूल में दीपिका का पेपर लिया गया। परीक्षा की तिथि भी बोर्ड ऑफ हायर सेकंेडरी एजूकेशन, दिल्ली की डेटशीट जैसी ही रखी गई। अब जब इंस्टीटच्यूट संचालक को पता लगा कि उसका भांडा फूट सकता है तो उसने फिलहाल इंस्टीटच्यूट में बच्चों के दाखिले का काम बंद कर दिया है और उन्हें ट्यूशन दे रहा है।



पुलिस व शिक्षा विभाग अनजान



इस बड़े रैकेट की जानकारी न तो पुलिस के पास है और न ही शिक्षा विभाग के पास। दोनों ही इस तरह की धोखाधड़ी से अंजान हैं। पुलिस, शिक्षा विभाग और इस्टेट ऑफिस ने पिछले काफी समय से इस तरह के इंस्टीटच्यूट्स की जांच के लिए कोई कार्रवाई नहीं की है।



कहीं खुद ही फंस न जाएं धोखेबाजी के शिकार..



ऐसे इंस्टीटच्यूट की धोखाधड़ी का शिकार हुए छात्र/छात्राएं कानूनी पंेच में फंस सकते हैं। अपने सर्टिफिकेट के नकली होने की जानकारी से अनजान ये छात्र/छात्राएं फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर अच्छे संस्थानों में दाखिला और नौकरी तक हासिल करने का प्रयास करते हैं। नकली सर्टिफिकेट इस्तेमाल करने पर संस्थान इन पर केस दर्ज करा सकता है। ऐसे में जैसे ही आपको पता चले कि आपका सर्टिफिकेट नकली है तो पुलिस को सूचना दें।



मैं चाहता हूं कि आरोपी पकड़ा जाए। पुलिस को शिकायत देने का मन बना रहा हूं, हालांकि डर लगता है कि कहीं खुद ही किसी पचड़े में न फंस जाऊं। पहले ही बेटी का साल खराब हो चुका है।



पंकज, दीपिका के पिता



हमारे पास खन्ना, पटियाला, मोहाली और चंडीगढ़ से शिकायतें आ रही है। बोर्ड अपने स्तर पर ही बच्चों के करिअर से खिलवाड़ करने वालों को तलाश रहा है। पहले यह रैकेट राजस्थान में फैला था। वहां कुछ लोग पकड़े गए थे। अब यह रैकेट पंजाब व चंडीगढ़ में चल रहा है। बोर्ड पंजाब व चंडीगढ़ पुलिस को इस तरह के रैकेट को दबोचने के लिए चिट्ठी भी लिख रहा है।



राहुल यादव प्रवक्त ा, बोर्ड ऑफ हायर सेकेंडरी एजूकेशन, दिल्ली

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