Friday, November 13, 2009 03:00 [IST]  

danik bhaskarब्रेवो ब्लेसन : मुश्किलों को मात देने का जज्बा

अधीर रोहाल

achivmentचंडीगढ़. जन्म से ही एक किडनी और रीढ़ की हड्डी की गंभीर बीमारी स्पाइना बिफिडिया। हकीकत से वह अनजान नहीं, वह कहता है, ‘आई नो आई एम डाइंग’ लेकिन जिंदा रहने की इच्छा हर बार सिर उठा लेती है और जीत भी जाती है। नौ साल की उम्र में अगर उसके छह ऑपरेशन हो चुके हैं, तो इसी बीच वह छह भाषाएं सीख कर मुश्किलों को मात देने का जज्बा दिखा चुका है। ब्रेवो ब्लेसन..



बुधवार को सेक्टर-22 में अपने आसपास कैमरों के फ्लैश चमकते देख, ब्लेसन का चेहरा भी चमक उठता है। वह यहां मौजूद है क्रिकेट कोच योगराज सिंह के साथ। योगराज ब्लेसन को अपने साथ क्रिकेट की प्रैक्टिस में ले जाते हैं और इस बच्चे के इलाज के लिए शहर के लोगों से खुलकर मदद की अपील भी कर रहे हैं। पिता सुधाकरन और मां शर्ले भी साथ हैं। मां—बाप की जमा पूंजी बेटे के इलाज पर खर्च हो चुकी है और अब उम्मीद दूसरों पर टिकी है।



ब्लेसन भी मां—बाप की लाचारी से अनजान नहीं। तभी तो, पिता की जुबान से लाचारी भरे शब्द सुनते ही उनका हाथ थाम लेता है। ब्लेसन को इस जानलेवा बीमारी से बचाने के लिए ऑप्रेशन की जरूरत है, जिसपर 30 लाख रुपये खर्च होंगे। सेंट स्टीफन स्कूल सेक्टर—45 में तीसरी के छात्र ब्लेसन के पिता सुधाकरन कहते हैं, ‘जल्द ही ऑपरेशन न हुआ तो ब्लेसन की किडनी और ब्रेन पर असर पड़ने लगेगा।



उसके भारत और जर्मनी में तीन-तीन ऑपरेशन हो चुके हैं, लेकिन बीमारी से निजात दिलाने के लिए आखिरी ऑपरेशन बहुत जरूरी है। इस ऑपरेशन के लिए कुछ नहीं बचा है।’ तभी पास बैठा ब्लेसन हंसते हुए अपने पिता का हाथ दबाने लगता है।



छह भाषाएं जानता है ब्लेसन



जिंदगी ने भले ही ब्लेसन के साथ मजाक किया हो लेकिन ब्लेसन हारा नहीं है। नौ साल का ब्लेसन अंग्रेजी, हिन्दी, पंजाबी, मलयालम के अलावा जर्मन और स्पेनिश भाषाएं आसानी से बोल लेता है।

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