बारिश का शुक्रिया
भोपाल. बुधवार रात से हो रही बारिश किसानों के लिए अमृत वर्षा साबित हो रही है। इससे जहां बिजली संकट से जूझ रही राज्य सरकार की मुश्किलें आसान हुई हैं, वहीं कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक इस वर्षा से प्रदेश में रबी फसल का रकबा आठ लाख हेक्टेयर तक बढ़ जाएगा।
यह बारिश रबी की बोवनी कर चुके किसानों के लिए पहली सिंचाई और बोवनी के लिए तैयार किसानों को पलेवा की सौगात लेकर आई। मालवा-निमाड़ और भोपाल-जबलपुर में जमकर पानी बरसा है। इससे गेहूं, चना, मटर और अलसी जैसी रबी की मुख्य फसलों को फायदा है।
सिर्फ जबलपुर, रीवा, बालाघाट, उमरिया व अनूपपुर के सीमित क्षेत्रों में किसानों को थोड़े नुकसान की खबरें हैं, जहां खरीफ में धान की देर से बुवाई हुई। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि गेहूं-चना जैसी फसलों के लिए बोवनी के 20 दिन बाद सिंचाई हो तो उपज में 20 फीसदी बढ़ोतरी होती है। गेहूं की जड़ों का विकास इसी अवधि में जोर पकड़ता है। इन दोनों व्यापक उपज वाली फसलों में गेहूं को पांच-छह और चने को दो-तीन बार सिंचाई की जरूरत होती है।
किसानों के लिए यह अच्छी खबर है कि इस बारिश ने पहले चक्र की सिंचाई की जरूरत ठीक समय पर पूरी की है। जिन किसानों ने बोवनी नहीं की है, उनके लिए अब पलेवा की जरूरत नहीं होगी। बुवाई का सिलसिला आमतौर पर नवंबर अंत तक जारी रहता है।
विशेषज्ञों की राय
चने में जेजी-130 और जेजी-315 व गेहूं में लोक-1 व मालव शक्ति किस्मों को ही अब बोया जाना चाहिए। यदि दो-तीन दिन में मौसम खुलता है तो फसलों के लिए बेहद अनुकूल स्थिति बनेगी। यदि ऐसा ही नम मौसम रहा तो चने में कीट प्रकोप की संभावना हो सकती है। इस हालत में किसानों को नीम और मट्ठे के घोल के छिड़काव की तैयारी रखनी चाहिए। इल्ली के प्रकोप से बचने के लिए अभी रासायनिक कीटनाशकों की बजाए यही जैविक उपाय ज्यादा बेहतर है।
जैविक उपायों पर अमल करें
बारिश से अधिकांश क्षेत्रों के किसानों में खुशी का माहौल है। मौसम पर नजर रखते हुए अगले दो-तीन दिनों में किसानों को चने की फसल में थोड़ी सावधानी की जरूरत है। कीट प्रकोप से बचने के लिए शुरुआत में रसायनों की जगह जैविक उपायों पर अमल करना उचित होगा।
सुरेश मोटवानी, कृषि विशेषज्ञ
पिछले चौबीस घंटे के दौरान होशंगाबाद जिले में 25.8 मिमी औसत बारिश हो चुकी है। वहीं होशंगाबाद शहरमें इस दौरान 36.8 मिमी बारिश से मौसम खुशनुमा बना हुआ है। जिले में अब तक 1311.7 मिमी औसत बारिश हो चुकी है। गुरुवार को शहर का अधिकतम तापमान 29.2 व न्यूनतम तापमान 18.0 डिग्री रहा।
हरदा जिले में भी देर रात से सुबह तक बारिश का दौर चलता रहा। सुबह 11 बजे तक आसमान में कोहरा जमा रहा। बीते चौबीस घंटे में 35.9 मिली बारिश दर्ज की जा चुकी है। वहीं जिले में अब तक 1261.7 मिमी सामान्य बारिश हो चुकी है। बैतूल में सुबह-शाम रिमझिम के बाद मौसम खुला रहा। जिलेभर में इस दौरान 0.28 मिमी बारिश रिकार्ड की गई है। जिले में अब तक 1000.7 मिमी बारिश हो चुकी है। शहर का तापमान 27.4 व 18.9 डिग्री सेल्सियस रहा।
गुना जिले में बूंदाबांदी के साथ देर रात शुरू हुई बारिश ने जिले में किसानों के चेहरे खिला दिए हैं। पिछले २४ घंटों में १२.क् मिमी बारिश दर्ज करा दी। इससे शहर के तापमान में भी गिरावट आई। इस तरह जिले का तापमान सामान्य से १३ डिग्री नीचे पहुंच गया। वहीं दिन का तापमान १६.४ डिग्री पर आकर रात को १३.क् हो गया।
सीहोर में ठिठुरन बढ़ी
सीहोर में पिछले 24 घंटों में रुक-रुककर हो रही बारिश ने ठिठुरन बढ़ा दी है। गुरुवार सुबह न्यूनतम तापमान 12.5 डिग्री दर्ज किया गया। सीहोर ब्लाक में 19 मिमी बारिश दर्ज की गई है। मौसम पूर्वानुमान केंद्र प्रभारी प्रो. एमडी व्यास के मुताबिक इस बारिश से किसी प्रकार की क्षति नहीं है। जिन खेतों में धान की फसल काटकर रख दी गई है उनके लिए यह बारिश प्रतिकूल हो सकती है।
विदिशा में हुई 27 मिमी बारिश
जिले में 24 घंटे के दौरान 27.8 मिमी बारिश हुई है। यह बारिश फसलों के लिए वरदान साबित हो रही है। वर्तमान में सिंचाई के लिए जिस पानी की जरूरत किसानों को थी उसकी पूर्ति प्रकृति ने पूरी कर दी है। करीब दो करोड़ रुपए की बचत इस बारिश के कारण किसानों को हुई है। कृषि उपसंचालक एनएस रघु ने बताया कि इस बारिश से किसानों को एक पानी की बचत हुई है।
कृषि : सही समय पर पानी गिरा
एक दम सही समय पर पानी गिरा है। खरीफ की फसल खलिहानों से निकल चुकी है इसलिए उसे बारिश से नुकसान होने की संभावना नहीं है, वहीं रबी की फसल की लक्ष्य से अधिक बोवनी होने की संभावना है। जो किसान नहरों के पानी का इंतजार कर रहे थे वे भी अब समय पर बोवनी कर सकेंगे। इस सब से उत्पादन बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा सिंचरई के लिए अब पंपों की जरूरत नहीं पड़ेगी जिससे सरकार के लिए कम से क म 15 दिनों की बिजली की बचत होगी।
डॉ. जी एस कौशल, पूर्व निदेशक, कृषि विभाग
बिजली :1400 मेगावाट की राहत
इस बारिश ने राज्य बिजली बोर्ड को 1400 मेगावाट की राहत दे दी है। पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने उत्पादन करीब साढ़े छह सौ मेगावाट घटा दिया है। बुधवार को दिन में शुरू हुई बारिश के चलते पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने देर रात से ही उत्पादन घटाना शुरू कर दिया। हर उत्पादन इकाई से औसतन 50 मेगावाट कमी की गई। मंगलवार को कंपनी थर्मल पॉवर से 2440 मेगावाट बिजली पैदा कर रही थी, इसे अब 1800 मेगावाट पर ले आया गया है। बुधवार को प्रदेश में बिजली की मांग छह हजार मेगावाट पर थी जो अब 4400 मेगावाट पर आ गई है।










