वराहमिहिर को समर्पित तारामंडल
उज्जैन. हाईब्रिड तकनीक से बनने वाले देश के पहले तारामंडल का शिलान्यास होने के साथ ही उज्जैन को एक और महत्वपूर्ण सौगात मिलने का रास्ता साफ हो गया है। इसका नामकरण आचार्य वराहमिहिर के नाम पर होगा। पुराने जमाने के सिक्कों की प्रदर्शनी भी इसमें स्थापित करने की योजना है।
करीब १२ करोड़ की लागत से मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद तथा उज्जैन विकास प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में बसंत विहार के वनस्पति पार्क में बनने वाले हाईब्रिड तारामंडल का शिलान्यास शुक्रवार को समारोहपूर्वक हुआ। कालिदास अकादमी परिसर स्थित पद्मभूषण पं. सूर्यनारायण व्यास स्मृति बहुउद्देश्यीय सांस्कृतिक संकुल में आयोजित समारोह में प्रदेश के उद्योग एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने घोषणा की कि तारामंडल विश्वविख्यात गणितज्ञ आचार्य वराहमिहिर के नाम पर होगा।
आचार्य के नाम पर डाक टिकट जारी करने की अनुशंसा भी की जाएगी। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह कार्यवाह सुरेश सोनी, गणितज्ञ डॉ. घनश्याम पांडे, मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक प्रो. पीके वर्मा, प्राधिकरण अध्यक्ष मोहन यादव, उपाध्यक्ष वीरेंद्र कावड़िया आदि मौजूद थे। शुरुआत में अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया। मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के वैज्ञानिक डॉ. राजेश शर्मा ने प्रस्तावित तारामंडल की जानकारी दी।
मुख्य अतिथि को स्कंदपुराण भेंट: समारोह में अतिथियों का स्वागत किया गया। मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह कार्यवाह सुरेश सोनी को प्राधिकरण अध्यक्ष मोहन यादव ने स्कंदपुराण भेंट किया।
तारामंडल का भवन खास डिजाइन का होगा। इसका मूल स्वरूप मंदिरनुमा होगा। डोम की आकृति मंदिर जैसी होगी तथा ऊपर शिखर की आकृति होगी। खास बात यह है कि इसके निर्माण में सभी धर्मो के समन्वय के साथ विज्ञान व पुरातत्व विज्ञान का भी समावेश होगा। मप्र विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी परिषद के महानिदेशक प्रो. पीके वर्मा के मुताबिक इसे हाई ऑप्टिकल फाइबर से वेधशाला से जोड़ा जाएगा तथा अंतरिक्ष के सभी घटनाक्रम तारामंडल में प्रत्यक्ष देखे जा सकेंगे। यह रोबोटिक कंट्रोल तथा थ्री-डी एनीमेशन युक्त होगा।










