शहनाई के सुर पर महंगाई की ताल
पाली. अपनी बेटी के हाथ पीले करने और नई-नवेली दुल्हन घर लाने का सपना संजोए बैठे अभिभावकों को इस बार शादी पर पहले की अपेक्षा डेढ़ गुणा अधिक खर्च वहन करना पड़ेगा। रिकार्ड सावों की धूम ने पाली के बाजार में दस्तक दे दी है। व्यापारियों को इस सावों की सीजन में रिकार्ड बिक्री की आशा है, लेकिन बढ़ती महंगाई को लेकर वह भी आशंकित है।
इधर लोग भी तय बजट और महंगाई के बीच तालमेल बिठाने में जुटे हुए है। शादियों की सीजन को लेकर विवाह स्थल की बुकिंग तो धड़ल्ले से हो रही है लेकिन सोना-चांदी में दिन-प्रतिदिन हो रहे उतार-चढ़ाव के चक्कर में लोग खरीदारी करने से घबरा रहे है। शादी-—विवाह की खरीदारी को लेकर व्यापारी और ग्राहक कितने तैयार है, इस पर रिपोर्ट -
दुकाने कम, इसलिए नहीं है चिंता
रेडिमेड कपड़ों में तो उतार—-चढ़ाव होता रहा है लेकिन शुटिंग-—शटिंग में हुई भावों की तेजी ने व्यापारी को वर्ग को खासा चिंतित किया है। व्यवसायी माणक भाई पंवार व नेमीचंद देवड़ा ने बताया कि इस बार भावों में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। 20 वर्षो की दुकानदारी में आज तक शुटिंग-शटिंग में इतनी तेजी का सामना नहीं हुआ। शहर में इन
दिनों सूरत, अहमदाबाद, मुंबई, भीलवाड़ा आदि स्थानों से कपड़ा मंगवाया जा रहा है।
व्यापारी बताते है कि दुकानों की संख्या नहीं बढ़ने के कारण भाव बढ़ने के बावजूद ग्राहकी अच्छी रहने की उम्मीद रहती है। इधर, रेडिमेड कपड़ों में भी 20 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है लेकिन व्यापारी अच्छी ग्राहकी की उम्मीद लगाए बैठे है।
अधिक कीमत के बाद ही बजेगी शहनाई
विवाह के दौरान बजने वाली बैंड-बाजों की स्वर लहरियां भी गत वर्ष की अपेक्षा इस बार पन्द्रह से बीस प्रतिशत अधिक कीमत देने के बाद ही सुनाई देगी। डीजल, मजदूरी, घोड़े आदि के बढ़े दामों ने बैंड वादकों को भी महंगा कर दिया है। तय राशि नहीं मिलने की स्थिति में इस बार वे बैंड वादकों की संख्या में कमी करने से भी नहीं चूकेंगे।
शहर में लगभग 19=20 दुकाने बैंड की है, जिन पर बुकिंग तो प्रारंभ हो चुकी है लेकिन पैमेंट को लेकर संशय बना हुआ है। बुक करने वाले जहां यह सोचकर कि कहीं ऊंचे दाम मिलने पर बैंडवादक दूसरी जगह नहीं चले जाए पैमेंट देना चाहते है तो दूसरी ओर बैंडवादक सीजन के दौरान उसके अनुरुप ही पैमेंट लेने का मानस बनाए हुए है।
भाव के साथ बढ़ा रुझान
शहर में साल-दर-साल केटरिंग की ओर लोगों का रुझान बढ़ता जा रहा है। जिसका अंदाजा इनके पास आ रहे ऑर्डरों से लगाया जा सकता है। लेबर और रॉ मेटेरियल के दामों में बढ़ोतरी के चलते केटरिंग के भाव भी 15 से 20 प्रतिशत बढ़े है। लेकिन अधिकांश कार्यो के झंझट से मुक्ति पाने की लालसा में लोग एकमुश्त राशि देना ही उचित समझ रहे है। इस व्यवसाय से जुड़े अक्षय कुमार ने बताया कि सामान्यतया एक व्यक्ति का खर्चा 130 से 160 के बीच बैठ जाता है।
फैशन के साथ होती है वृद्धि
पुरुषों की अपेक्षा महिला परिधानों के भावों में वृद्धि फैशन के अनुरुप होती रहती है। इसको लेकर व्यापारी भी सचेत है। बढ़ते स्टेटस सिंबल का परिणाम ही है कि पहले जहां एक-—दो हजार की साड़ी खरीदने में ग्राहक हिचहिचाहट करते थे वहीं उनकी मांग के अनुरुप दुकानदारों को 15 से 20 हजार तक की साड़ियां रखनी पड़ रही है। व्यवसायी उत्तमचंद मूथा बताते है कि रॉ मेटेरियल और डिजाइनिंग आदि के महंगे होने से भावों में तेजी आना लाजिमी है।










