सागर को स्विटजरलैंड की संज्ञा दी थी चाचा नेहरू ने
सागर. आज बाल दिवस है। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू का जन्म दिवस बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। सागर में पहली बार जब पं नेहरू आए तो यहां की खूबसूरत एवं प्राकृतिक वादियों से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने सागर को स्विटजरलैंड की संज्ञा दे दी।
वह प्रदेश के पहले विवि डॉ. गौर विवि के दीक्षांत समारोह एवं लाइब्रेरी का शिलान्यास करने 29 अक्टूबर 1952 को सागर आए थे। एक दिन सागर में रुके। उन्हें सर्किट हाउस में ठहराया गया था। यहां से उन्होंने सागर का नजारा देखा और कहा- यह सागर नहीं, स्विटजरलैंड है। इसके विकास की जरुरत है। वह सागर आकर बहुत प्रसन्न हुए।
दैनिक भास्कर ने पं. नेहरू के सागर आगमन को लेकर उस दौरान मौजूद कुछ लोगों से चर्चा की तो वह उस समय की यादों में खो गए।
जब जॉन पहुंचा पं. नेहरू के पास- मकरोनिया में विवि द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया गया। पं. नेहरू गार्ड ऑफ ऑनर ले रहे थे। उसी समय विवि का पुराना ड्राइवर जॉन सुरक्षा घेरे को तोड़कर पं. नेहरू के पास जा पहुंचा। सुरक्षा गार्डे ने जान को पकड़ा।
तभी पं. नेहरू ने सुरक्षा गार्डे को रोका और कहा उसे आने दो। जॉन ने पं. नेहरू का स्वागत किया। पं. नेहरू जॉन से प्रसन्न हुए। उनके सागर से जाने के बाद जान चर्चा का विषय बना रहा।
डी-लिट की उपाधि दी- 29 अक्टूबर को विवि के दीक्षांत समारोह में पं. नेहरू को डी-लिट की उपाधि दी गई। उस समय विवि के वाइस चांसलर डॉ. रामप्रसाद त्रिपाठी एवं रजिस्टार डॉ. ईश्वरचंद थे। मंच पर पं. रविशंकर शुक्ल भी बैठे थे।
दीक्षांत समारोह में कोषाध्यक्ष प्रो. आनंद मंगल मिश्र, एडवोकेट बीएल सेठ, बीएल सर्राफ, गोपीलाल श्रीवास्तव, गौरीशंकर श्रीवास्तव, डिप्टी रजिस्टार परमानंद वाजपेयी, बालचंद मलैया, श्री गोदरे, श्रीमती कलावती दीक्षित, रामदुलारी पाठक, राणा जमशेर जंग, पूर्व एमएलए स्वामी कृष्णानंद, पं. ज्वालाप्रसाद ज्योतिषी, आचार्य नंददुलारे वाजपेयी, डॉ. रसाल, डॉ. चिपलूकर, डॉ. डीआर भवालकर, श्रीमती भवालकर, प्रो. राय, डॉ. रामरतन भटनागर, डॉ. रामलाल सिंह, डॉ. रधुनाथ पांडे, प्रो. अर्गल, डॉ. मिश्रा, श्रीमती कमला सहित अन्य प्रतिष्ठित नागरिक भी मौजूद थे।
लाइब्रेरी का शिलान्यास किया- पं. नेहरू ने 30 अक्टूबर 1952 को विवि की लाइब्रेरी का शिलान्यास किया। पहले लाइब्रेरियन डॉ. बीएल पाठक थे। लाइब्रेरी में तीन लाख 87 हजार किताबें हैं। नेहरूजी की याद में बनाई गई यह लाइब्रेरी देश की समृद्ध लाइब्रेरी में से एक है।










