बालकवि जुटाएगा ‘बाल श्रमिकों’ के लिए धन
कोटा. कहते हैं कि इंसान में अगर कुछ कर गुजरने की क्षमता हो तो वह तमाम बाधाओं को पार कर मंजिल तक पहुंच ही जाता है। उसका दृढसंकल्प, इच्छाशक्ति और कड़ी मेहनत एक दिन उसे कामयाबी की सीढ़ियों पर सवार कर बुलंदियों तक पहुंचा देती है।
व्यक्ति की प्रतिभा किसी भी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती और ना ही इसमें उम्र का कोई बंधन होता है। इस बात को साबित कर दिखाया है कोटा के उभरते हुए बालकवि व देश के सबसे कम उम्र के साहित्यकार आदित्य जैन ने।
महज 9 साल की उम्र में दिल्ली में लालकिले के मंच से कविता पाठ करना, छोटी सी उम्र में 200 कविताओं को कंठस्थ कर तीन काव्य संग्रह लिखना हर किसी के बस की बात नहीं, लेकिन आदित्य ने इसे कर दिखाया है। खेलने—कूदने व दादा—दादी से कहानियां सुनने की उम्र में इस बाल कवि ने राष्ट्रीय मंचों पर बेहतरीन प्रस्तुतियां दी।
इतना ही नहीं कोटा के इस बालकवि ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का इंटरव्यू लेकर उनके जीवन पर एक पुस्तक भी लिख दी है। बाल दिवस के मौके पर बहुमुखी प्रतिभा के धनी नन्हे साहित्यकार आदित्य ने ‘भास्कर’ ने बातचीत की। आदित्य ने बालदिवस पर ‘बाल श्रमिकों’ के उत्थान के लिए अपनी कविताओं के माध्यम से धन एकत्र कर उनकी मदद करने का अभियान चलाने का संकल्प लिया है।
भास्कर : छोटी सी उम्र बड़ा कमाल कैसे ?
आदित्य : जब मैं 5 वर्ष का था, तब पापा कैसेट पर कविताएं सुना करते थे, मुझे भी इसमें आनंद आता था। धीरे—धीरे मैं भी कविताएं लिखने लगा, पहले घर और स्कूल में कविताएं सुनाता तो तालियां और आशीर्वाद मिलता। उचित मार्गदर्शन और शुरुआती संघर्ष के बाद आज मैं इस मुकाम पर हूं।
भास्कर : कविताएं लिखना व शब्दों का संग्रह कैसे करते हो ?
आदित्य : मैं बचपन से ही समाचार पत्र, न्यूज चैनल, मैग्जीन आदि पढ़ता आ रहा हूं। इनमें से ही कुछ ज्वलंत मुद्दे उठाकर कविताएं लिखता हूं। शब्दों में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती आम बोलचाल की भाषा के शब्द यूज करता हूं ताकि लोगों को आसानी से समझ आ सके।










