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Saturday, November 14, 2009 09:55 [IST]  

danik bhaskarआमना की उम्मीद

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मुंबई. टेलीविजन का जाना-पहचाना चेहरा होने से किसी को बॉलीवुड का टिकट तो मिल सकता है, लेकिन उसे बॉक्स ऑफिस पर सफलता मिल ही जाए, यह जरूरी नहीं है। आमना शरीफ के साथ भी ऐसा ही है, जो बॉलीवुड में न्यूकमर की तरह संघर्ष कर रही हैं। हालांकि इस बारे में आमना का कहना है, ‘मुझे इसका कोई मलाल नहीं है। मैंने टीवी पर जो तीन साल गुजारे, उसी की वजह से आज मैं बॉलीवुड में हूं।’



वैसे आमना का बॉलीवुड में पदार्पण भी स्टाइल से हुआ। शुरुआत से ही उनकी आफताब शिवदासानी से लिंक-अप की खबरें आने लगी थीं। उनकी अब तक की दोनों फिल्मों में आफताब ही उनके को-स्टार हैं। इस पर आमना का कहना है, ‘आफताब एक सहकलाकार के रूप में बहुत अच्छे हैं और हम दोनों एक साथ काम करते हुए काफी सहज रहते हैं। उन्होंने एक अभिनेता और निर्माता के तौर पर अपने काम में जिस तरह का संतुलन बनाया है, उससे मैं काफी प्रभावित हूं।’



आमना की पहली फिल्म ‘आलू चाट’ बॉक्स ऑफिस पर भले ही धड़ाम हो गई हो, लेकिन उन्हें अपनी दूसरी फिल्म ‘आओ विश करें’ से काफी उम्मीदें हैं। इसमें आमना एक बैले टीचर की भूमिका में नजर आ रही हैं, जो मूलत: एक परीकथा है। जब उन्हें बताया जाता है कि इस तरह की फिल्मों को अमूमन भारतीय दर्शक स्वीकार नहीं करते तो उनका जवाब होता है, ‘अतीत में इसी शैली पर आई फिल्में भले ही फ्लॉप हो गई हों, लेकिन ‘आओ..’ यथार्थपरक फिल्म है। मैं इसे जादुई परीकथा नहीं कहूंगी। हां, इसमें कुछ हद तक ऐसा जरूर है।’

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