विशेष: सचिन का मिशन 2015
42 साल की उम्र तक खेलते रहने की चाह लिए सचिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में धूम मचाते जा रहे हैं। लोग उनके संन्यास को लेकर भले ही कयास लगाते रहें लेकिन सचिन मानसिक व शारीरिक रूप से पूरी तरह से फिट हैं। देश के लिए खेलते रहने का जुनून उन्हें बल्ले से कमाल करने के लिए प्रेरित करता है।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लगातार 20 साल से खेल रहे और 87 अंतरराष्ट्रीय शतक व लगभग 30 हजार रन बना चुके 36 वर्षीय मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर की फिटनेस अबूझ पहेली बन गई है। उनमें अभी भी पहले जैसी चपलता और आक्रामक स्ट्रोक्स मारने की क्षमता है। वे विकेट के बीच इतनी तेजी से दौड़ लगाते हैं कि लगता है कि टीम इंडिया के सबसे तेज रनर हैं।
अपनी शारीरिक व मानसिक दृढ़ता पर पूरा-पूरा भरोसा जताते हुए सचिन ने अब यह संकेत भी दे दिया है कि उनका मिशन 2015 तक खेलने का है। अर्थात वे 42 साल की उम्र तक खेलते रहना चाहते हैं। सचिन की इस तमन्ना से यह तो तय है कि अगले छह साल में उनके बल्ले से ढेरों कीर्तिमान बनेंगे, लेकिन उससे ज्यादा इस बात की चर्चा अवश्य होगी कि वे इतने दिनों तक फिट रहने के लिए क्या-क्या करेंगे।
एग्रेशन जरूरी
अपनी फिटनेस का राज खोलते हुए सचिन ने मीडिया से कहा कि योगासन, लगातार जिम जाने और मैदानी व्यायाम करते रहने से कोई भी खिलाड़ी लंबे समय तक फिट रह सकता है। उनका कहना है कि प्रत्येक खिलाड़ी का अपना डाइट चार्ट होना चाहिए। यदि आपने शारीरिक शक्ति पर जीत दर्ज कर ली तो उसके बाद मानसिक शक्ति को मजबूत बनाना आवश्यक है।
मास्टर ब्लास्टर कहते हैं, सच तो यह है कि एग्रेशन सिर्फ दिलो- दिमाग में होना चाहिए, न कि सिर्फ शारीरिक स्तर पर। स्वयं के बारे में सचिन ने कहा, क्रिकेट मेरी जिंदगी है। धन कमाना ही मेरा उद्देश्य नहीं है बल्कि देश के लिए खेलने का जुनून ही क्रिकेट से दूर होने के बारे में सोचने नहीं देता है।
इंजुरी नो प्रॉब्लम
सचिन कहते हैं, मुझे कई बार इंजुरी के कारण क्रिकेट से दूर रहना पड़ा। कभी ‘टेनिस एल्बो’तो कभी कमर के दर्द के कारण लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। हां, चोट का फायदा यह हुआ कि मुझे कुछ दिनों के लिए आराम मिल जाता था, जिससे मैं तरोताजा होकर वापसी करता था और रन जुटाने लग जाता था।
और भी हैं सचिन के सिवाय
सचिन के 20 साल तक खेलते रहने को चकित होकर देखा जा रहा है लेकिन खुद उनका कहना है कि चूंकि वे 16 साल की कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आ गए थे इसलिए बीस साल का अरसा ज्यादा लग रहा होगा। वे कहते हैं, वैसे देखा जाए तो मेरी उम्र तो सिर्फ 36 साल है। मेरे से ज्यादा उम्र में अभी तक श्रीलंका के सनथ जयसूर्या व मुथैया मुरलीधरन खेल रहे हैं। यदि भारत के ही अन्य खिलाड़ियों की बात की जाए तो दिवंगत सीके नायडू, सीएस नायडू और मुश्ताक अली 50 साल से ज्यादा उम्र तक घरू क्रिकेट में खेलते रहे। ये तीनों ढलती उम्र में छक्का मारने में भी माहिर थे।
99.5 प्रतिशत फिट
मेरे ख्याल से सचिन 99.5 प्रतिशत फिट हैं। क्रिकेट का कोई भी फॉर्मेट हो सचिन को कोई फर्क नहीं पड़ता है। वे मैच की पहली गेंद से लेकर आखिरी गेंद तक आक्रामक प्रहार करने में माहिर हैं। सचिन पर बढ़ती उम्र का कोई असर नहीं पड़ेगा।
विवियन रिचर्डस
बेमिसाल सचिन
मैं सचिन तेंडुलकर को ही डॉन ब्रेडमैन के समकक्ष मानता हूं। वे अनूठे बल्लेबाज हैं तथा शायद ही कोई ऐसा गेंदबाज होगा जो यह कह सके कि सचिन ने उनकी गेंदों की धुनाई नहीं की है। सचिन गेंदबाज के सिर के ऊपर से जो छक्का जड़ते हैं वह दर्शनीय होता है।
शेन वार्न
ऑफ बीट शॉट..
फास्ट बॉलर बनने का सपना
कॅरियर की शुरुआत में सचिन का सपना फास्ट बॉलर बनना था। वे चेन्नई की एमआरएफ पेस अकादमी में ट्रायल के लिए गए भी थे, लेकिन उनका छोटा कद आड़े आया और देश एक महान बल्लेबाज को खोने से बच गया! उन्हें टेनिस का भी जुनून था। वे अमेरिकी टेनिस स्टार जॉन मेकेनरो के फैन थे। वे स्विस टेनिस स्टार ब्योन बोर्ग के समर्थक दोस्तों से झगड़ भी लेते थे।
दु:ख पर यूं पाया काबू
इंग्लैंड में हुए 1999 के विश्वकप में ब्रिस्टल में केन्या के खिलाफ मैच के पहले प्रेक्टिस के दौरान गहरा काला चश्मा लगाए सचिन अनमने से घूम रहे थे। आमतौर पर वे मैदान पर ऊर्जा से उफनते-से नजर आते हैं। उन्हें कभी गेंदबाजी करते, कभी कैच लेते तो कभी चिल्लाकर अपने किसी साथी को कोई सलाह देते देखा जाता है।
हाल ही में पिता को खो चुके सचिन ने काला चश्मा अपनी दर्द और आंसू भरी आंखें छिपाने के लिए पहना था। वे यह मैच खेलना नहीं चाहते थे पर परिजनों ने दबाव डाला कि इसी तरह वे अपना दु:ख भुला सकेंगे। द. अफ्रीका व जिम्बाब्वे से हारने के बाद टुर्नामेंट में बने रहने के लिए केन्या से जीतना जरूरी था। सचिन ने नाबाद 140 रन बनाकर टीम को जीत दिलाई। शतक बनाकर उन्होंने आसमान की ओर देखकर पिता को याद किया तो दर्शकों की आंखें भीग आई।
गेंद से रोमांच
सचिन ने गेंद से भी रोमांच पैदा किया है। हीरो कप के सेमीफाइनल में कोलकाता के इडन गरडस पर सचिन का अंतिम ओवर कौन भुला सकता है। 24 नवंबर 1993 की उस शाम 196 के मामूली लक्ष्य को हासिल करने के लिए दक्षिण अफ्रीका को अंतिम ओवर में छह रन चाहिए थे। कप्तान अजहरुद्दीन के सामने दुविधा थी कि गेंद किसे दें। वे कपिल को गेंद देते पर सचिन ने बीड़ा उठाया। पेस व मूवमेंट में परिवर्तन कर उन्होंने ओवर में 3 रन दिए। ओवर में डिविलिर्स रन आउट हुए और भारत दो रनों से जीत गया।
बॉल टेंपरिंग
दक्षिण अफ्रीका में 2001 की सीरिज के पोर्ट एलिजाबेथ में हुए दूसरे टेस्ट में ऐसे टीवी फुटेज आए जिससे लगता था कि सचिन ने गेंद की सीम निकाल दी है। मैच रेफरी माइक डेनिस ने सचिन को दोषी मानकर एक टेस्ट का प्रतिबंध लगा दिया। मैच में चार खिलाड़ियों को ज्यादा अपील करने और कप्तान गांगुली को उन्हें कंट्रोल न करने के आरोप में जुर्माना लगाया गया। बाद में आईसीसी ने जांच के बाद सचिन पर लगा प्रतिबंध हटा दिया।
पहली बार की शिकायत
पाकिस्तान के 2004 के दौरे में मुल्तान में हुए दूसरे टेस्ट के दूसरे दिन 16 ओवर रहते कार्यवाहक कप्तान राहुल द्रविड़ ने पारी घोषित कर दी जबकि सचिन उस समय दोहरे शतक से मात्र छह रन दूर थे। शाम को प्रेस कांफ्रेंस में जब इस बारे में सवाल पूछा तो सचिन ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया कि वे निराश हैं और पारी घोषित किए जाने से चकित हैं। भारतीय टीम में उनके कद और विवाद को टालने की उनकी प्रवृत्ति को देखते हुए उनके इस बयान पर मीडिया में काफी चर्चा हुई।
गले पड़ी गिफ्ट
सचिन ने डॉन ब्रेडमैन के 29 टेस्ट सेंचुरी के रिकॉर्ड की बराबरी की तो ऑटोमेटिव कंपनी फेरारी ने फामरूला वन रेसर शूमाकर के हाथों फेरारी 360 मोडेना कार भेंट की। तब के वित्तमंत्री जसवंत सिंह ने सचिन से कहा कि उनकी उपलब्धि के सम्मान में कार पर कस्टम ड्यूटी माफ कर दी जाएगी। हालांकि कानूनन गिफ्ट पर छूट नहीं दी जा सकती थी। मई 03 में संशोधित कानून पारित किया गया। इस तरह 75 लाख रुपए की कार पर 120% के हिसाब से 1.13 करोड़ रु. की ड्यूटी माफ की गई। यह बात जाहिर हुई तो राजनीतिक दलों ने शोर मचा दिया। मामला दिल्ली हाईकोर्ट में गया। सचिन ने ड्यूटी भरने की पेशकश की। अंतत: फेरारी कंपनी ने यह शुल्क अदा किया।










