सेंक्चुरी व पार्क में कुल्लू अव्वल
कुल्लू. हिमाचल प्रदेश में कुल्लू सेंक्चुरीज एरिया व नेशनल पार्क के लिहाज से अव्वल बन गया है। पहले ही ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क से हिमाचल पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। यहां पर विश्व की तुलना में सबसे अधिक जाजुराणा की संख्या दर्ज की गई है।
वार्सिलोना में आयोजित वर्ल्ड कंजरवेशन कांग्रेस में भारत की ओर से भाग लेने वाले ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के पूर्व निदेशक संजीव पांडे ने बताया कि पूरी दुनिया में जाजुराणा के 500 जोड़े हैं, जिनमें से अकेले 100 जाजुराणा के जोड़े ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में मौजूद हैं।
इसके अलावा 765 वर्ग किलोमीटर में फैले ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में कई दुर्लभ जंगली जानवरों व पक्षियों की प्रजातियां मौजूद है। जिसके लिए इसे 16वें नेशनल वाईल्ड लाईफ बोर्ड ने यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज के लिए मनोनित किया है। अब जिले को एक और नेशनल पार्क तथा एक सेंक्चुरी और मिली है। इसकी सारी औपचारिकताएं पूरी हो गई है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से भी इसे हरी झंडी मिल गई है।
कई दुर्लभ प्रजातियां हैं मौजूद
कुल्लू जिले में मनाली, कायस, कनावर, खोखण, तीर्थन व सैंज में सैंक्चुरीज है। अब इसमें हामटा के समीप इंद्रकीला वन्य प्राणी शरण्य स्थल के रूप में एक और सैंक्चुरी का इजाफा हुआ है। यह सैंक्युरी 104 वर्ग किलोमीटर तक फैली हुई है। अप्रैल 2009 में इसका सर्वे पूरा किया जा चुका है और इसकी स्वीकृति मिल गई है।
जबकि मणिकर्ण घाटी में खीरगंगा नेशनल पार्क की मंजूरी मिली है। कुल्लू के डीएफओ बीएस राणा का कहना है कि कुल्लू जिला सेंक्चुरीज के हिसाब से पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर पूर्व में ही काबिज था और नेशनल पार्क के हिसाब से भी कुल्लू अव्वल बन गया है। कुल्लू में जंगली जानवरों की कई दुर्लभ प्रजातियां मौजूद हैं।










