किसी से उन्नीस नहीं हमारा हुनर
चंडीगढ़. जरा सोचिए आपको ऐसे संगीत पर झूमने के लिए कहा जाए जिसे आप सुन न सकते हों, शायद आपके कदम साथ न दें। लेकिन इन बच्चों के साथ ऐसा नहीं। संगीत इनके दिलो दिमाग में कानों के जरिए नहीं उतरा, फिर भी रोम रोम में ऐसा समाया कि ये किसी भी नॉर्मल बच्चे के मुकाबले कहीं ज्यादा बेहतर नाच ही नहीं सकते, अगर मुकाबला हो जाए तो उन्हें पछाड़ भी सकते हैं।
इसी जज्बे के साथ इन बच्चों ने कई मुकाबलों में ढेरों इनाम अपने नाम दर्ज किए हैं। ब्लू बर्ड पब्लिक स्कूल—रोपड़ के मूक-बधिर इन बच्चों ने भंगड़े, गिद्दे, क्विज और स्काउट व गाइड गतिविधियों में भाग लेकर बुलंदियां छुई हैं। बाल दिवस के मौके पर शनिवार को सेक्टर 27 स्थित रामलीला ग्राउंड में ‘खुशियों की बहार’ कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे।
द डेफ वे फाउंडेशन की ओर से शहर में पहली बार आयोजित किए गए इस कार्यक्रम में चंडीगढ़ के अलावा हरियाणा व पंजाब के विभिन्न राज्यों के स्कूलों के करीब 350 मूकबधिर बच्चों ने अपनी प्रतिभा के जौहर दिखाए।
साइन लैंग्वेज से डांस स्टेप्स : टीचर (इंटरप्रेटर) मीना ने बताया कि इन बच्चें को साइन लैंग्वेज के जरिए डांस स्टेप्स सिखाए गए। भंगडा, गिद्दा हो या फिर बॉलीवुड के गाने, इन्हें सभी पर डांस करना सिखाया गया। इन्होंने कई बार सामान्य बच्चों के साथ जिला स्तर तक भंगड़े,गिद्दे की प्रतियोगिताओं में भाग लिया। कई इनाम भी जीते लेकिन हर बार नतीजों के बाद ही बताया जाता है की ये बच्चे मूक-बधिर हैं ताकि कोई दया भावना से इन्हें विजेता घोषित न कर इनकी प्रतिभा को देखे।
इन्होंने सामान्य बच्चों के साथ कई क्विज भी जीती हैं। क्विज के दौरान इंटरप्रेटर के जरिए या लिख कर सवालों के जवाब दिए जाते थे। क्विज में स्टेट लेवल की प्रतियोगिताओं में इनाम जीते। 15 अगस्त और 26 जनवरी पर होने वाले कार्यक्रम में भी मार्च पास्ट कर रहे हैं।
लिप रीडिंग से पढ़ाई : स्कूल प्रिंसिपल आदर्श शर्मा ने बताया कि स्कूल में 102 मूक-बधिर बच्चे पढ़ रहे हैं। यह सभी सामान्य बच्चों के क्लासरूम में बैठते हैं। लिप रीडिंग के जरिए ये शब्दों को समझते हैं और कुछ न समझ आए तो आखिरी के दो पीरियड्स में इंटरप्रेटर समझा देती है।










