बस के टाइम पर लगते हैं स्कूल
जबलपुर. सुबह की पाली लगने का समय सुबह 10.30 से सायं 4.30 बजे तक है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के जो स्कूल मुख्य मार्ग पर हैं अगर बस के पहुंचने का समय 11 या फिर 12 बजे दोपहर है तो शिक्षक भी उसी समय स्कूल पहुंचेंगे। अगर बस का समय उस गांव में पहुंचने का दोपहर 2.00 या 2.30 बजे है तो शिक्षक और प्राचार्य की रवानगी भी इतने बजे ही हो जाती है।
जो स्कूल मुख्य मार्ग से अन्दर हैं, उन स्कूलों की हालत और खराब है, वहां पदस्थ शिक्षक पूरे सप्ताह स्कूल नहीं आते, लेकिन अपनी उपस्थिति स्कूल में बाकायदा दर्ज करा रहे हैं। अधिकारियों के आकस्मिक निरीक्षण के चलते ये शिक्षक ऐसी व्यवस्था भी करके रखते हैं कि वे उपस्थित रहने वाले शिक्षक को छुटटी का आवेदन देकर जाते हैं, ताकि आकस्मिक कार्रवाई से बच सकें।
कई शिक्षक करते हैं अप-डाउन
जिले में लगभग 2250 प्राथमिक शालाएं, 650 माध्यमिक शालाएं तथा लगभग 136 हाई एवं हायर सेंकेडरी स्कूल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ शिक्षक और प्राचार्य में से लगभग 75 प्रतिशत शिक्षक और प्राचार्य जबलपुर में रहते हैं और स्कूलों के लिए अप-डाउन करते हैं। जिन स्कूलों में भृत्य हैं, उनकी मुसीबत जरूर है, क्योंकि उन्हें प्रतिदिन स्कूल खुलने से लेकर बंद होने तक रुकना पड़ता है।
होनहारों के भरोसे स्कूल
कुछ स्कूलों के प्राचार्यो ने यह व्यवस्था भी कर रखी है कि स्कूल के कार्यालय की चाबी स्कूल के होनहार बच्चों को दी है, ताकि वे आकस्मिक निरीक्षण के दौरान स्कूल के रजिस्टर आदि की जांच करा सकें। कुल मिलाकर हर व्यवस्था का तोड़ शिक्षकों और प्राचार्यो ने निकाल कर रखा है।
गायब रहने वाले मजे में
अधिकारियों द्वारा किए गए आकस्मिक निरीक्षणों में यह बातें सामने आ चुकी हैं शायद ही कोई स्कूल ऐसा रहा होगा, जहां पर प्राचार्य और शिक्षक पूरी संख्या में उपस्थित रहे हों। बहरहाल, अभी निरीक्षण बंद चल रहे हैं इसलिए गायब रहने वालों की मौज है। जसे ही निरीक्षण शुरू होंगे, फिर नई जानकारियां जिला शिक्षा विभाग के सामने आएंगी।










