ज्वाइन करके नौकरी छोड़ रहे डॉक्टर
जबलपुर. चिकित्सा शिक्षा हो या फिर लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण दोनों विभागों में डॉक्टर नौकरी ज्वाइन करने के बाद छोड़ रहे हैं। लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग में संविदा चिकित्सक नौकरी को चाहे जब बाय-बाय कह देते हैं तो चिकित्सा शिक्षा में रेग्यूलर नौकरी को भी डॉक्टर ठुकरा देते हैं। सरकार के सामने रिक्त पदों को भरने की चुनौती तो है ही, साथ ही इसकी भी मुश्किल है कि जो डॉक्टर आ रहे हैं वे कहीं अव्यवस्थाओं के चलते नौकरी को टाटा ने कर दें।
मेडिकल में तीन साल में करीब आठ डॉक्टरों ने नौकरी छोड़ी दी। इसमें दो डिमांस्ट्रेटर हैं और दो सर्जन और अन्य विशेषज्ञ चिकित्सक शामिल हैं। इसी तरह एल्गिन अस्पताल में भी एक डॉक्टर ने नौकरी छोड़ी तो तीन डॉक्टर समय से पहले स्कीम का लाभ लेकर घर बैठ गये। विक्टोरिया में दो सीनियर डॉक्टरों ने आना ही बंद कर दिया है। ये डॉक्टर चाह रहे हैं कि शासन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करे।
मेडिकल में हाल ही की भर्ती प्रक्रिया में करीब आधा दर्जन ऐसे डॉक्टर ऐसे आये, जिन्होंने नियुक्ति पत्र तो लिया, पर मेडिकल में नौकरी करने नहीं आये। संभाग स्तर पर सात डॉक्टर ऐसे चिन्हित किये गये हैं, जिन्होंने वर्षो से अस्पताल की ओर रुख नहीं किया है।
इन सात डॉक्टरों के खिलाफ लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग ने बर्खास्तगी की कार्रवाई अब प्रारंभ की है। संबंधित गायब डॉक्टरों के घरों में पत्र व्यवहार किया गया है कि अपना पक्ष रखें नहीं तो नियम अनुसार कार्रवाई कर उन्हें बर्खास्त कर दिया जायेगा। वैसे विभाग इन लापता डॉक्टरों की तलाश में जुटा है।
कई बस गये विदेश में
यदि प्रदेश स्तर पर देखा जाए तो करीब 450 ऐसे डॉक्टर हैं, जो वर्षो से गायब हैं। इनमें से कई विदेश में जाकर बसे गये हैं और अपने संबंधित अस्पताल में इस्तीफा भी नहीं दे गये हैं। विभाग इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए घर की तलाश कर रहा है। गत वर्ष इन्हीं में से 100 से अधिक डॉक्टरों को सरकार बर्खास्त भी कर चुकी है।
जानकर कहते हैं कि चिकित्सा शिक्षा विभाग से ज्यादा समस्या अब लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग में जहां रेग्यूलर नियुक्ति न होने से डॉक्टर काम में रुचि नहीं लेते हैं और जैसे बेहतर विकल्प सामने आता है वे पुराने अस्थाई नौकरी को त्याग देते हैं।
बर्खास्तगी की कार्रवाई जारी
जो भी डॉक्टर वर्षो से नहीं आये हैं, उनके खिलाफ शासन अपने स्तर पर कदम उठा रहा है। चूंकि यह सारी प्रक्रिया लम्बी होती है, इसलिए कुछ समय लग रहा है। गांव में डॉक्टर पहुंचे कोई बिना बताये गायब न हो हम इसका प्रयास कर रहे हैं। - डॉ. जेएल मिश्रा, ज्वाइंट डायरेक्टर हैल्थ










