Sunday, November 15, 2009 05:09 [IST]  

danik bhaskarउपेक्षा से साधु-संत नाराज

भास्कर संवाददाता

उज्जैन. सिंहस्थ 2016 की तैयारियों के लिए सिंहस्थ प्राधिकरण ने बैठकों का दौर तो शुरू कर दिया है लेकिन इसमें साधु-संतों की उपेक्षा की गई। इसको लेकर अखाड़ा परिषद प्रतिनिधि महंत नाराज हो उठे हैं। अभा अखाड़ा परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि महंत भगवानदास (हनुमंत निवास, उज्जैन) ने सिंहस्थ प्राधिकरण अध्यक्ष को कठघरे में खड़ा किया है।



महंत का कहना है सिंहस्थ का महत्व साधु-संतों से है लेकिन तैयारियों की बैठक में साधु-संतों को ही हाशिए पर कर दिया। उनके मुताबिक सिंहस्थ समितियों में स्थानीय प्रतिनिधियों को ही लिया जाता है और उनके सामने जो कठिनाइयां आती हैं, उनको दूर करने में साधु-संतों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसके बावजूद साधु-संतों की उपेक्षा क्यों की जा रही है?



महंत का आरोप है वर्तमान में जो बैठकें हुई हैं उनमें सिंहस्थ क्षेत्र के विकास की ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। सिंहस्थ क्षेत्र में अतिक्रमण हो रहा है जिसे रोकने की जरूरत अधिक है। सिंहस्थ के दौरान सबसे बड़ी समस्या साधु-संतों व अखाड़ों को भूमि आवंटन की आती है। महंत भगवानदास साधु-संतों की उपेक्षा से अखाड़ा परिषद को अवगत कराएंगे।



सफल नहीं होगा उद्देश्य



सिंहस्थ प्राधिकरण प्रबंधन साधु-संतों को ही किनारे कर रहा है। इससे जिन उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण का गठन किया है वे पूरी तरह सफल नहीं हो सकेंगे। - महंत भगवानदास, प्रतिनिधि अभा अखाड़ा परिषद अध्यक्ष



उपेक्षा नहीं हो रही



साधु-संतों के बिना सिंहस्थ की कल्पना ही नहीं की जा सकती। इस कारण इनकी उपेक्षा नहीं की जा रही है बल्कि तैयारियों पर चर्चा कर उनसे मार्गदर्शन लिया जाएगा। - दिवाकर नातू, अध्यक्ष सिं.प्रा.

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