एक और पॉजिटिव
पानीपत. स्वाइन फ्लू ने एक और मासूम को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। पांच वर्षीय मासूम की जांच दिल्ली के एक प्राइवेट लैब में कराई गई थी, जहां इसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। शनिवार को मासूम के माता-पिता सिविल अस्पताल पहुंचे और वहां डाक्टरों से फ्लू वीर दवा ली।
हालांकि जिला स्वास्थ्य विभाग को इसके बारे में कोई सूचना नहीं है। पॉजिटिव मासूम की मां ने बताया कि बच्चे में लक्षण दिखने के बाद उसकी जांच दिल्ली के प्राइवेट लैब में करवाई थी। जांच में स्वाइन की पुष्टि हुई है। इस प्रकार अब पानीपत में पॉजिटिव रोगियों की संख्या छह तक पहुंच गई है।
दस की रिपोर्ट निगेटिव आई
स्वास्थ्य विभाग की ओर से भेजे दस सैंपलों की रिपोर्ट शनिवार को आ गई। इनमें सभी मरीज निगेटिव मिले हैं। इन रिपोर्ट के बाद भले ही स्वास्थ्य महकमा राहत की सांस ले रहा हो, लेकिन लोगों में दहशत नहीं कम हो रही है। फिलहाल शनिवार को सिर्फ दस सैंपलों की रिपोर्ट आई है।
बाकी रिपोर्ट रविवार शाम तक आएगी। शनिवार को भी जांच के लिए लोगों को तांता लगा रहा। जिनमें लक्षण गंभीर दिखे, स्वास्थ्य कर्मियों ने उनके सैंपल लिए और जांच के लिए दिल्ली भेज दिए गए हैं। जिन मरीजों के लक्षण गंभीर दिखे, डाक्टरों ने उसकी जांच की और सैंपल जांच के लिए भेज दिए।
आठ सैंपल भेजे
पॉजिटिव मरीज मिलने के बाद लोगों के सिर से फ्लू फोबिया खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। विशेषज्ञों के कमरे के बाहर लोगों की भीड़ लगी रही। शनिवार को डाक्टरों ने आठ लोगों के सैंपल लिए। शुरुआती जांच में सभी में स्वाइन के लक्षण दिखे। इसी कारण उनके सैंपल लिए गए। इनकी रिपोर्ट सोमवार को आएगी। बाकी मरीजों को फ्लू की दवा दे दी गई है।
स्वाइन फ्लू
बर्ड फ्लू, स्वाइन फ्लू और इसके बाद वायरस के म्यूटेशन से न जाने और कौन-कौन सी बीमारियां होती हैं। जब तक वैज्ञानिक एक बीमारी की दवा ईजाद करते हैं, दूसरी बीमारी सामने होती है। डाक्टरों की मानें तो स्वाइन फ्लू समेत सभी बीमारियांे से लड़ने का सबसे कारगर तरीका है कि हम अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएं। इसे कैसे बढ़ाएं, इस बारे में भास्कर ने आयुर्वेद, एलोपैथी और होम्योपैथी के विशेषज्ञों से बात की।
क्या है रोग प्रतिरोधक क्षमता
रक्त में मौजूद प्रोटीन एंटीबॉडीज और श्वेत रक्त कणिकाएं शरीर पर हमला करने वाले जीवाणुओं (बैक्टीरिया) और विषाणुओं (वायरस) को रोकने का काम करती हैं। उनका यही गुण रोग प्रतिरोधक क्षमता कहलाता है। अलग-अलग जीवाणुओं—विषाणुओं के प्रति अलग-अलग प्रकार के एंटीबॉडीज बनते हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता कुछ रोगों के प्रति जन्मजात होती है, तो कुछ के प्रति शरीर में टीकों या एंटीबायोटिक दवाओं के जरिए विकसित की जाती है।
नेचुरल जीवन शैली से फायदा
डॉक्टरों का कहना है कि रोजाना सात घंटे की नींद लेने, खूब पानी पीने, शाहाकार, 40 से 60 मिनट तक व्यायाम, भ्रमण व मन को स्थिर रखना भी क्षमता बनाए रखने का जरिया है।
आयुर्वेद के मुताबिक सर्दी का मौसम रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए सबसे सही समय होता है। इसमें गोंद, मेथी, अजवाइन के लड्डू खाकर क्षमता बढ़ सकती है। हल्दी, अदरक, तुलसी, दालचीनी मददगार होते हैं।
होम्योपैथी में सभी दवाइयां रोगी के लक्षण और उसकी मानसिक स्थिति देखकर दी जाती हैं। स्वाइन फ्लू के लिए आर्सेनिक एल्बम दवा की मांग है। इसे केवल स्वाइन फ्लू से पीड़ित लोगों के संपर्क में रहने वालों को लेने की जरूरत है।
एलोपैथी में आहार और विटामिन की गोलियों के माध्यम से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की सलाह दी जाती है। आहार में हरी सब्जियां, फल, अंकुरित दालें, नीबू, आंवला, टमाटर और विटामिन्स में बी-कॉपलेक्स, सी, ई, कैल्शियम, सेलेनियम, फेक्टर एक्स और कार्मिटोन आदि लिए जाते हैं।










