Sunday, November 15, 2009 07:56 [IST]  

danik bhaskarयूं जुड़े सचिन के अलवर से तार

भास्कर न्यूज

अलवर. क्रिकेट के शहंशाह सचिन तेंदुलकर के क्रिकेट सफर में अलवर की भी एक रोचक दास्तान जुड़ी हुई है। बात उस समय की है जब सचिन का टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण नहीं हुआ था। उभरते युवा खिलाड़ियों की राष्ट्रीय टीम के चयन के लिए शिविर का आयोजन हुआ था। यह 1987 का वर्ष था जब अलवर की क्रिकेट प्रतिभा पवन गोयल को भी चयनकर्ताओं ने शिविर में बुलाया था। सचिन पश्चिमी क्षेत्र से चुनकर आए थे वहीं अलवर के पवन का चयन मध्य क्षेत्र से हुआ था।



सचिन के अंतरराष्ट्रीय कैरियर के बीस वर्ष पूरे होने पर पवन गोयल उन यादों को 22 साल बाद एक बार फिर ताजा करते हुए बताते हैं कि सचिन के पैड ने उन दोनों के तार जोड़ दिए थे। हुआ यूं कि इंदौर में जब 24 युवा खिलाड़ियों के लिए कैंप लगा तब सभी पूरे मनोयोग से प्रशिक्षण ले रहे थे।



पवन ने बताया कि शिविर में प्रशिक्षण के दौरान उनके घुटने में चोट लगने के कारण वे टीम में नहीं चुने जा सके थे लेकिन सचिन ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर राष्ट्रीय टीम में जगह बना ली थी। शिविर के दौरान ही सचिन का पैड कहीं गुम हो गया। सचिन अपने पैड को ढूंढने में परेशान हो गए। इस दौरान मैं चोट लगने के कारण अलवर लौट आया था।



सचिन ने मुझे अलवर फोन कर बातचीत की और अपने पैड गुम होने के बारे में बताया। उन्हें जब यह पता चला कि पैड मेरे पास नहीं है तो बड़ी उदारता के साथ ‘सॉरी’ भी कहने से नहीं चूके। उनमें महानता के लक्षण उस समय से ही मौजूद थे। पवन का कहना है कि ऐसे महान खिलाड़ी के साथ बिताए कुछ पलों को वे आज भी अपने दिल में सहेजे हुए हैं। पवन ने शनिवार को ही सचिन तेंदुलकर को फोन कर उनके अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 20 वर्ष पूरे होने की बधाई दी।



गोयल ने बताया कि शिविर में भाग ले रहे सभी खिलाड़ियों को उस समय फिल्म देखने का शौक था लेकिन कोच बसु परांजपे इतना थका देते थे कि बाद में कहीं जाने का मन ही नहीं करता था। पूरी तरह थक जाने के बाद भी सचिन मैदान पर व्यायाम करते या फिर बॉल को उछालते-कैच करते हुए खिलाड़ियों से बातचीत करने में मशगूल रहते थे। उनके चेहरे पर मैंने कभी थकान नहीं देखी, उनमें आज भी वही ताजगी है।

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