अंतत: कुलपति को कार्रवाई करना पड़ी
सागर. आवासीय संपरीक्षा के अफसर एवं कर्मचारी विवि में ऑडिट करते हैं, जिसके एवज में विवि को अतिरिक्त राशि देना पड़ती है। केंद्रीय विवि बनने के लगभग नौ बाद भी आवासीय संपरीक्षा के कार्य करने को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। दैनिक भास्कर ने इस संबंध में 10 नवंबर को खबर प्रकाशित की थी।
शुक्रवार को कुलपति प्रो. एनएस गजभिए ने आवासीय संपरीक्षा को हटाए जाने के लिए वित्त अधिकारी एवं अन्य अधिकारियों से चर्चा की। जानकारी के अनुसार प्रो. गजभिए ने मौखिक रूप से आवासीय संपरीक्षा को हटाने की अनुमति दे दी है। इस संबंध में उन्होंने आदेश जारी करने के लिए भी कहा है। गौरतलब है कि 15 जनवरी 09 को केंद्रीय विवि का दर्जा प्राप्त होने के बाद राज्य सरकार के अफसर-कर्मचारी को हटाने की कवायद शुरू हो गई थी।
विवि को प्राप्त होने वाली राशि का ऑडिट करने के लिए कुलपति ने आंतरिक संपरीक्षा का गठन किया था। लेकिन कई माह से आंतरिक संपरीक्षा एवं आवासीय संपरीक्षा एक साथ ऑडिट का कार्य देख रहे थे। जिस कारण दोनों के बीच गतिरोध की स्थिति बन गई थी। चालू वित्त वर्ष में भी आवासीय संपरीक्षा द्वारा ऑडिट का कार्य करने से कई मामले अटक गए।
कुलसचिव के बाद कौन?- नवंबर के दूसरे सप्ताह में कुल सचिव डॉ. परीक्षित सिंह की सेवाएं राज्य सरकार को वापस लौटाई जाने के बाद अब उप कुलसचिव, सहायक कुलसचिव की सेवाएं भी वापस लौटाए जाने की कार्रवाई शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय नवंबर के अंत तक उप कुलसचिव, सहायक उप कुलसचिव स्तर के अधिकारियों की भर्ती के लिए कार्रवाई शुरू कर सकता है। यह बात कैंपस में चर्चा का विषय बनी हुई है कि कुल सचिव के बाद अब किस अधिकारी के हटने की बारी है।
अवकाश पर चले गए- मंत्रालय द्वारा अन्य अफसरों की भर्ती की खबर से एक उप कुलसचिव स्तर के अधिकारी विगत दिनों लंबे अवकाश पर चले गए। कैंपस में चर्चा रही कि उन्हें हटाए जाने का अहसास हो गया है, इसलिए कार्य में मन नहीं लग रहा है।
लिफाफा खुलने का इंतजार- मंत्रालय द्वारा विगत माह कुलसचिव पद के लिए आवेदकों के इंटरव्यू लिए गए थे। लेकिन अभी तक लिफाफे नहीं खुले हैं। यहां लिफाफे खुलने का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है।










