राज ने बजाई कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी
मुंबई. महाराष्ट्र की जनता महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को धर्मनिरपेक्ष पार्टी और राज ठाकरे को धर्मनिरपेक्ष नेता मानने लगी है। पहली नजर में यह बात भले ही अटपटी और बेतुकी लगे, परंतु विधानसभा चुनाव में मुस्लिम व दलित बहुल सीटों पर मनसे प्रत्याशियों को मिले वोटों ने कांग्रेस-राकांपा के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।
मुंबई की ३६ विधानसभा सीटों में से भायखला, कुर्ला, कलिना, चांदिवली, मानखुर्द-शिवाजी नगर, अणुशक्ति नगर, अंधेरी (प.) और मालाड (प.) जैसी सीटें मुस्लिम बहुल मानी जाती है। इन सीटों पर शिवसेना का प्रभाव अब तक नगण्य रहा है। परंतु राज ठाकरे की नवगठित मनसे पार्टी ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में कलिना, चांदिवली और भायखला जैसी कांग्रेस की तीन महत्वपूर्ण सीटों पर नंबर दो का वोट हासिल कर कांग्रेस-राकांपा गठबंधन को अंदर से हिलाकर रख दिया है।
ध्यान रहे कि कलिना सीट से कृपाशंकर सिंह, चांदिवली से कैबिनेट मंत्री नसीम खान और भायखला से केंद्रीय मंत्री मुरली देवड़ा के करीबी मधु चव्हाण चुनाव जीते हैं। इन तीन सीटों की बात यदि छोड़ दी जाए, तो मनसे को मालाड (प.) में 16,450 अंधेरी (प.) में 18,236, मानखुर्द-शिवाजी नगर में 21,838, कुर्ला में 33,967 और अणुशक्ति नगर में 16,737 वोट मिले हैं।
चूंकि ये सारी सीटें मुस्लिम बहुल है, इसलिए कांग्रेस-राकांपा को लगने लगा है कि यदि मुस्लिम इलाकों में शिवसेना को सबक सिखाने के लिए मनसे को वोट मिलने लगे, तो भविष्य में उसके उम्मीदवारों का चुनाव जीतना मुश्किल हो जाएगा। इसी तरह का नजारा दलित बहुल सीट विक्रोली, घाटकोपर (पूर्व), चेंबूर, शीव-कोलीवाड़ा, वडाला और वरली में भी है। इसमें से विक्रोली की सीट से मनसे के टिकट पर मंगेश सांगले विधायक चुने भी गए हैं।
इसी तरह भांडुप (प.) की सीट से दलित और मराठी वोटरों के सहारा मनसे नेता शिशिर शिंदे भी अब विधायक बन गये हैं। कांग्रेस के रणनीतिकारों का मनना है कि चूंकि राज ठाकरे के साथ मराठी वोट बैंक है और यदि उन्होंने दलित-मुस्लिम वोटरों का भी पूरा समर्थन हासिल कर लिया, तो महाराष्ट्र में अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-राकांपा गठबंधन की हाल बहुत बुरी होगी। इस सच्चई से वकीफ होने के बावजूद अभी तक कांग्रेस को राज ठाकरे की काट न मिलना चिंता का विषय बताई जा रही है।










