Monday, November 16, 2009 01:16 [IST]  

danik bhaskarजब चूहे बोलेंगे और खूब राज खोलेंगे

अविनाश वाचस्पति

चूहे ने कंप्यूटर के आविष्कार के साथ ही माउस के नाम से कंप्यूटर नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। इस पर इनका कब्जा अब भी बरकरार है। इस क्षेत्र में उनकी थोड़ी-सी पैठ अब टचस्क्रीन के आने से टूटती लग रही है, पर इसकी गति बहुत धीमी है। आप सोच रहे होंगे कि धीमा ही सही, पर कब्जा कम तो हो रहा है, परंतु इंसान को सावधान हो जाना चाहिए, क्योंकि यदि एक क्षेत्र में चूहे की धाक कम हो रही है तो दूसरी ओर एक नया ही रास्ता हम चूहों के लिए ओपन करने में जुटे हुए हैं।



आपने वह खबर पढ़ ही ली होगी कि कैंब्रिज यूनिवर्सिटी ने ऐसे चूहे तैयार कर लिए हैं, जो मनुष्य की भाषा में बात करेंगे। अब चूहे अगर बोलेंगे तो भेद सारे खोलेंगे ही। चूहे घर में हर समय घूमते रहते हैं, इसलिए उनसे कोई भी चीज छिपी नहीं रहती है। आपको उनका पता हो या न पता हो, पर वे आपके बारे में पूरी जानकारी रखते हैं। आपकी रसोई में क्या पक रहा है, आपके बाथरूम में क्या हो रहा है, आपके बैडरूम में कौन सो रहा है, वे जानते तो सब पहले से ही हैं, लेकिन अब तक वे इस जानकारी को जाहिर नहीं कर पाते थे, क्योंकि वे बोल नहीं पाते थे।



लेकिन अब हम इंसान ही ऐसे चूहे बनाने में जुट गए हैं, जो हमारी भाषा में ही बात करेंगे। शोध पर विश्वास करें तो इसमें हमें सफलता मिल रही है। चूहे अगर मनुष्य की बोली में बात करेंगे तो चैनल वाले उन्हें इंटरव्यू के लिए जरूर बुलाएंगे। चर्चित लोगों के घरों में रहने वाले चूहों की चैनलों में डिमांड बहुत बढ़ जाएगी। ‘सच का सामना’ जैसे खूब सारे कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे, क्योंकि चूहे पूरी शिद्दत से सच का सामना करवाएंगे।



जब भेद चूहों ने ही उगलना है तो मेहनताना भी उन्हें ही मिलेगा और ताने मिलेंगे सच छिपाने वालों को। ऐसे-ऐसे रहस्य सामने आएंगे कि हम आप इसका अंदाजा भी नहीं लगा सकते। चूहे ये भी बतलाएंगे कि किसकी नालियों में कितने कॉकरोच रहते हैं, कितनी गंदगी है और उस गंदगी से भी अधिक किसके मन में कितना अधिक मैल है। घर में कितनी संख्या में नोटों की गड्डियां धरी हैं।



अभी तो एक मधु कोड़ा पकड़ा गया है। जब चूहे बोलने लगेंगे तो आप देखिएगा कि रोजाना कितने ही मधु कोड़ा पकड़े जाएंगे। जब चूहे बात कर सकेंगे तो फिर मोबाइल फोन भी चाहेंगे। लेकिन इन्हें स्वयं मोबाइल फोन खरीदने की जरूरत ही नहीं होगी। रात को आप अपने सिरहाने रखकर सोएंगे और ये उसे उठाकर मनमाफिक नंबर मिलाएंगे, क्या पता कब किस से बतियाएंगे।



इन्हें मोबाइल के बिल से क्या? इन्हें तो अपना बिल प्यारा होता है। मोबाइलधारक को अपना मोबाइल का बिल भी दुश्मन लगता है, बल्कि यूं कहना चाहिए कि इंसान को सभी प्रकार के बिल पीड़ा ही देते हैं। बातें तो सब खूब करते हैं, बिजली भी जलाते हैं, पानी भी बहाते हैं, कैड्रिट कार्ड का भी इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बिल मिलने पर जेब कटती प्रतीत होती है।



एक चूहा ही है, जिसे अपने बिल से खूब प्यार होता है। उधर, खुफिया एजैंसियों में भी चूहों का ही बोलबाला होगा और कुत्तों का मुंह काला होगा, क्योंकि तब एजैंसियों को डॉग स्क्वाड की जरूरत ही कहां रह जाएंगी! चूहे ही राज खोल देंगे। आप देखना कि जब चूहे बोलेंगे तो मनुष्य की बोलती ही बंद हो जाएगी।

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