तकनीक के फेर में फंसा सीवरेज
अमृतसर. शहर की चारदीवारी के भीतर का सीवरेज तकनीक के फेर में फंसा हुआ है। उचित तकनीक न मिलने और पंजाब सीवरेज बोर्ड के मुताबिक टेंडर न मिलने की वजह से दो बार पहले भी टैंडर लग चुके हैं। 16 नवंबर को तीसरी बार टैंडर लगेगा। यह कितना कामयाब होता है आने वाला समय बताएगा। फिलहाल 20 माह से बोर्ड प्रोजैक्ट की पहली किश्त साढ़े पांच करोड़ रुपए दबाए बैठा है।
विडंबना यह है कि बोर्ड के चेयरमैन डा. बलदेवराज चावला भी भीतरी शहर में ही रहते हैं। उल्लेखनीय है कि भीतरी शहर में तीस साल पुराना सीवरेज सिस्टम लगभग खत्म हो चुका है। नतीजतन सीवरेज की लीकेज पीने के पानी की पाइपों में जा रही है और लोग सीवरेज का पानी पीने रहे हैं। केंद्र सरकार के जवाहर लाल नैशनल रिन्यूवल अर्बन मिशन (न्यूरम प्रोजैक्ट) के तहत भीतरी शहर का सीवरेज सिस्टम 36.90 करोड़ से बदला जाना है।
मार्च 08 में मिवला पैसा
नगर निगम के कमिश्नर डीपीएस खरबंदा के प्रयास के बाद प्रोजैक्ट को न सिर्फ हरी झंडी मिली, बल्कि 14 मार्च 2008 को सरकार ने पहली किश्त का पचास फीसदी हिस्सा 4.08 करोड़ और प्रदेश सरकार ने अपना बीस फीसदी हिस्सा 1.63 करोड़ जारी कर दिया, लेकिन यह पैसा अभी तक बोर्ड दबाए बैठा है। एक पैसा सीवरेज पर नहीं लगाया गया। बोर्ड के ढीले रवैये का ठीकरा निगम के सिर फूट रहा है और गंदे पानी के लिए लोग निगम के सिस्टम को दोषी मान रहे हैं।
बोर्ड अधिकारियों के मुताबिक भीतरी शहर को 18 जोनों में बांटा गया है और इनमें विभिन्न तकनीकों के आधार पर काम होना है। जहां खुदाई करके सीवरेज बदला जाएगा, वहां तो उसी तकनीक से काम होगा, लेकिन तंग गलियों या ट्रैफिक वाले क्षेत्रों में ट्रेंच लैंस तकनीक और सीआईपीपी लाइनिंग तकनीक से सीवरेज का काम होगा। इसमें बिना खोदाई के पाइप लाइन बदली जाएगी। यह तकनीक महंगी होने की वजह से कुछ क्षेत्रों में ही इनका उपयोग होगा।
20 फीसदी की उपेक्षा
सीवरेज बोर्ड के रवैये की वजह से शहर की 20 फीसदी आबादी उपेक्षित है। शहर के 2.5 प्रतिशत एरिए में 13 वार्ड पड़ते हैं। इतनी बड़ी आबादी को सीवरेज बोर्ड की वजह से गंदा पानी पीना पड़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक वॉल्ड सिटी का पचास फीसदी सीवरेज ठीक हालत में है, पर बंद पड़ा होने के कारण वह उपयोग नहीं हो रहा। प्रोजैक्ट में उनकी सफाई करवाने, होदियों का काम करवाकर उसे ठीक हालत में बनाने आदि की रूप रेखा बन रही है। प्रोजैक्ट को जल्द से जल्द शुरू करना आति आवश्यक हैं।
मार्च 2008 के प्रोजैक्ट की पहली किश्त आई हुई है। सीवरेज बोर्ड ने सीवरेज डालना है। सरकार को वर्तमान पोजीशन को लेकर 2 जून को फिर पत्र लिखा गया है। सीवरेज जल्द बदलना जरूरी है। - डीपीएस खरबंदा, कमिश्नर, निगम
16 नवंबर को तीसरी बार प्रोजैक्ट का टेंडर लगेगा। पहले रेट ठीक न होने से काम शुरू नहीं हो सका। काम को जल्द शुरू करने के लिए टीमें बन चुकी हैं। कई तकनीकों से सीवरेज बदला जाएगा। - गुरमीत सिंह, एक्सईएन, सीवरेज बोर्ड
लोगों को स्वच्छ पानी मुहैया कराने के लिए बोर्ड प्रतिबद्ध है। टेंडर के रेटों को लेकर थोड़ी मुश्किल आ रही थी। इस वजह से प्रोजैक्ट में देर हो रही है। जल्द ही इसे शुरू कर दिया जाएगा। - डा. बलदेवराज चावला, चेयरमैन










