बर्फ में नहीं फंसेंगे अब लोग
कुल्लू. लाहौल स्पीति की बर्फबारी हर बार पर्यटकों को जख्म देती रही है। मौसम कब अंगड़ाई ले, यहां कुछ पता नहीं चलता, लेकिन स्नो एंड एवलांच एस्टेबलिशमेंट स्टडी सेंटर (सासे) अब मौसम में समय से पहले होने वाले बदलावों की सटीक सूचना देगा।
सासे ने पर्वत प्रोजेक्ट का काम भारतीय मौसम विभाग, नेशनल सेंटर फॉर मीडियम रेंज वेदर फोरकास्टिंग और भारतीय सेना के साथ मिलकर किया है। इसमें मध्य हिमालयी क्षेत्रों में हुए मौसम की हर हलचल को कैद किया गया था। अब ‘सेंट्रल प्रोजेक्ट’ पर्यटकों और स्थानीय लोगों को प्रशासन की मदद से 1 किलोमीटर के दायरे में मौसम की परिवर्तनशीलता की जानकारी देगा।
श्रीनगर, सियाचिन और मनाली में एयर स्टेशन स्थापित किए गए है। मध्य हिमालयी क्षेत्रों में 40 से अधिक वेदर स्टेशन स्थापित किए हैं। मौसम पर निगाहें रखने के लिए 20 ऑब्जर्वेटरी भी स्थापित की है। सासे के डायरेक्टर अश्वघोष गंजू का कहना है कि सासे के वैज्ञानिक बर्फबारी की हर सूचना सेना की मदद से जिला प्रशासन को देंगे।
इससे पर्यटकों को पहले ही भारी बफबारी से सचेत किया जाएगा। लोग खाद्य सामग्री का स्टॉक घरों में रखते हैं, लेकिन पानी के लिए उन्हें घोड़ों और गधों से काम लेना पड़ता है। पानी, बिजली और दूरसंचार यहां पूरी तरह से ठप रहता है। घाटी के फूंचोग, अजय, रीना लाहुली और उरज्ञान डोलमा का कहना है कि सरकार को कारगर कदम उठाए चाहिए।
कुल्लू और लाहौल में हर बार जख्म देती है बर्फ
पर्यटकों को हर बार रोहतांग और आसपास में बर्फ के फाहों का दीदार भारी पड़ता जा रहा है। वर्ष 2008 के सितंबर में 17 वें करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे समेत सैकड़ों लोग फंसे थे। इस साल बारालाचा और सरचू के पास भरतपुर में 280 लोग इसकी गिरफ्त में आए। इनमें 6 विदेशी थे। स्पीति में भू-स्खलन के कारण 150 पर्यटक फंसे जिनमें 16 विदेशी थे। इसी साल बर्फबारी में दर्जनों लोगों को मौत के मुंह से बचा लिया गया है।










