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Monday, November 16, 2009 01:48 [IST]  

danik bhaskarलड़खड़ाई गैस आपूर्ति

रमिंद्र सिंह

अम्बाला. सर्दियों के साथ ही शहर में गैस की आपूर्ति लड़खड़ाने लगी है। पंद्रह दिन की बुकिंग के बाद भी उपभोक्ताओं को गैस नहीं मिल पा रही। सुबह से ही गैस के लिए दौड़ शुरू हो जाती है। किसी भी गोदाम पर देख लीजिए खाली सिलेंडरों के साथ उपभोक्ताओं की भीड़ मिल ही जाएगी।



हालांकि गैस किल्लत की सबसे बड़ी वजह होटलों की भट्टी और बाजार में जगह-जगह लगी रेहड़ियों व खाने-पीने की अन्य दुकानों पर रसोई गैस का इस्तेमाल होना है। सांठ-गांठ के जरिए आसानी से सिलेंडर हासिल हो रहे हैं, मगर ऐसा नहीं है कि प्रशासन ने गैस की किल्लत से निपटने के कोई प्रयास नहीं किए हों।



कुछ दिनों पहले कुछ छापे भी लगाए गए मगर नतीजा सिफर ही रहा है। सर्दियों में गैस की खपत बढ़ जाती है, पहले यदि सिलेंडर महीना भर चलता था तो अब 20 से 25 दिन में ही खत्म हो रहा है। अभी सर्दी ज्यादा नहीं पड़ी है।



मगर ज्यादा सर्दी पड़ते ही खाने-पीने की गर्म वस्तुओं की मांग बढ़ेगी, घरों में पानी गर्म करने के लिए भी गैस उपयोग की जाएगी जबकि शादी-ब्याह का सीजन भी यौवन पर है तो खपत में अवश्य बढ़ौत्तरी होगी। ऐसे में सिलेंडर की परेशानी बढ़ना सर्दियों में लाजमी है।



महंगा न हो जाए सिलेंडर



दालों, सब्जियों के बाद सिलेंडर भी किचन के बजट में आग लगा सकता है। सर्दियों से पहले बढ़ती मांग और ऊपर से सिलेंडरों के महंगा होने का खतरा, ऐसे में सिलेंडरों भी कहीं स्टाक न हो जाए। बता दें कि कुछ दिनों पहले ही पेट्रोलियम मंत्रालय ने प्राकृतिक गैस की कीमतों में 31 फीसदी इजाफे के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस नोट को जल्द कैबिनेट बैठक में लाए जाने की संभावना भी है। यदि प्रस्ताव पास होता है तो इस झटके का असर हर वर्ग पर पड़ना लाजमी है।



हर दिन पांच हजार सिलेंडर की डिमांड



गैस की किल्लत का मुख्य कारण गैस कंपनियों द्वारा दी जाने वाली शार्ट सप्लाई है। कैंट क्षेत्र में सात गैस एजेंसियां है और आबादी के हिसाब से इन गैस एजेंसियों को हर दिन 5 हजार सिलेंडर मिलने चाहिए, यानि 5 हजार सिलेंडर की मांग कैंट क्षेत्र में हर दिन है। मगर इन एजेंसियों को लगभग 2300 गैस सिलेंडर हर दिन मिल पा रहे हैं। कम सप्लाई के कारण उपभोक्ताओं परेशान हो रहे हैं।



शहर में गैस किल्लत का सबसे मुख्य कारण इंडेन, भारत गैस आदि कंपनियों की मनमानी है। सूत्रों की मानें तो गैस की सप्लाई शहर में नियमित नहीं आ रही जिस वजह से यह दिक्कत पैदा हो रही है। यदि कंपनियां सप्लाई नियमित तौर पर करती रहें तो शहर में गैस की आपूर्ति की कमी ही पैदा न हो।



कालाबाजारी रोकने के लिए नाकाफी प्रशासन के प्रयास



घरेलू गैस के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रशासन के प्रयास अब तक कमतर ही रहे हैं। सर्दियां शुरू होते ही ऐसा कोई विशेष अभियान नहीं छेड़ा गया है। केवल कुछ स्थानों पर मामूली दबिश डालकर कागजी कार्रवाई पूरी की जा रही है। बाजारों में घूमने निकल जाए तो खासकर रात्रि के समय दर्जनों व्यवसायिक जगहों पर घरेलू गैस का उपयोग होते दिख जाएगा। रात्रि के समय दुकानदार भी बेधड़क हो जाते हैं क्योंकि विभागीय स्टाफ 5 बजे के बाद छुट्टी जो कर लेता है।



सिलेंडर गोलमाल में प्रशासन आगे



घर में हेराफेरी हो तो बाहर क्या सुधार करें! जिला प्रशासन की हालत ही कुछ ऐसी ही है। सिलेंडर चोरी शहर में कैसे रूके जब सरकारी विभाग ही सिलेंडरों में गोलमाल कर रहा है। ताजा उदाहरण सदर नगर परिषद में है जहां खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा जब्त किए गए 20 सिलेंडर गोदाम में रखवाए गए थे, मगर अब जब दोबारा जांच की गई तो गोदाम में सिलेंडर ही नहीं मिले। विभाग के अधिकारी जांच के लिए दो बार नगर परिषद का चक्कर काट चुके हैं।



पूरी कर रहे हैं डिमांड



प्रशासन और उपभोक्ताओं के मध्य फंसी गैस एजेंसियां इस नाजुक समय में भी गैस की आपूर्ति शहर में बनाए हुए हैं। अम्बाला एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के अध्यक्ष केवल सिंह बताते हैं कि उपभोक्ताओं की मांग को हर हाल में पूरा किया जा रहा है।

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