सेंक्चुरी एरिया से बाहर
शिमला. सुख भरे दिन आ गए रे भईया। प्रदेश में सेंक्चुरी से प्रभावित लोगों के लिए खुशी की खबर है। नेशनल वाईल्ड लाईफ बोर्ड के बाद केंद्रीय सशक्त समिति (सीईसी)ने भी प्रदेश सरकार द्वारा 33 क्षेत्रों को सेंक्चुरी से बाहर करने के लिए भेजे गए प्रस्ताव पर अपनी स्वीकृति की मौहर लगा दी है। अब महज सर्वोच्च न्यायलय द्वारा स्वीकृति प्रदान करने की औपचारिकता ही शेष रह गई है। अमूमन सीईसी द्वारा लिए निर्णय को अंतिम समझा जाता है।
प्रस्तावित सेंक्चुरी में से कुल 873.36 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र बाहर होगा। बाहर होने वाले क्षेत्र के हिसाब से कुल 783 गांवों के बाशिंदे लाभान्वित होंगे। नियमों के अनुसार जितना क्षेत्र सेंक्चुरी से बाहर होगा उतना ही क्षेत्र प्रदेश सरकार को कहीं ओर उपलब्ध करवाना पड़ता है। इसके एवज में वाइल्ड लाइफबोर्ड को सरकार ने नेशनल पार्क के लिए कुल्लू स्थित भूमि उपलब्ध करवाई है। वैसे सेंक्चुरी से बाहर होने वाले क्षेत्र की तुलना में उपलब्ध करवाया गई भूमि का क्षेत्रफल काफी अधिक है।
बाहर होने वाला क्षेत्र 873.36 वर्ग किलोमीटर है, जबकि वाइल्ड लाइफ बोर्ड के पास इसके बदले आने वाले क्षेत्र का रकबा 1490. 85 वर्ग किलोमीटर है। गौरतलब है कि सेंक्चुरी से प्रभावित लोग वर्षो से संजोए सपनों को पूरा कर पाएंगे। अभी तक ये लोग घुट-घुट कर जीने के लिए मोहताज हैं। नए मकान के नाम पर एक ईंट तक लगाने का सपना तो दूर पुराने मकान की मुरम्मत करने की इजाजत भी नहीं मिलती।
आण्यपाल वन्य प्राणी केएस ठाकुर ने बताया कि सेंक्चुरी के संबंध में प्रदेश सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड द्वारा लिए गए निर्णय पर केंद्रीय सशक्त समिति(सीईसी) ने भी सहमति जता दी ही। अब इन क्षेत्रों को सेंक्चुरीज से बाहर करने संबंधि मामला सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है। जिसे शीघ्र ही स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।










