गैस आधारित पावर प्लांट मांगा
शिमला. मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने केंद्र से हिमाचल में 500 मेगावाट क्षमता का गैस आधारित पावर प्लांट स्थापित करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि सर्दियों में जल स्तर गिरने से विद्युत परियोजनाओं में बिजली का उत्पादन गिर जाता है।
राज्य को बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने केंद्र के समक्ष लंबित जनरेशन टैक्स लगाने की मांग को मंजूरी प्रदान करने का अनुरोध करते हुए इस मुद्दे पर सकारात्मक रुख अपनाने की जरूरत पर जोर दिया।
दिल्ली में ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर हुए औद्योगिककरण के कारण 2012 तक सर्दियों में बिजली की मांग व आपूर्ति में 800 मेगावाट का अंतर आ जाएगा। जिसके स्थाई समाधान की जरुरत है।
उन्होंने अल्ट्रा मेगावाट बिजली परियोजनाओं से हिमाचल को आवंटित 100 मेगावाट बिजली को बढ़ाकर 400 मेगावाट करने का भी आग्रह किया, ताकि उर्जा आवश्यकता का स्थाई समाधान हो। उन्होंने केंद्र से गैर आवंटित कोटा के अंतर्गत हर साल 15 अक्तूबर से 15 अप्रैल तक 15 फीसदी हिस्सा राज्य सरकार को नीतिगत तौर पर देने की मांग की। केंद्र को गैर आवंटित बिजली कोटा की तदर्थ नीति से राज्य को उचित समय पर पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं हो रही है।
चिन्हित 23000 मेगावाट जल विद्युत क्षमता से अब तक 6500 मेगावाट का दोहन किया गया है। 11वीं पंचवर्षीय योजना के अंत तक 10 हजार मेगावाट क्षमता का दोहन किया जाएगा। धूमल ने 2500 करोड़ रुपए की लागत की जल विद्युत परियोजनाओं की तकनीकी आर्थिक स्वीकृति प्रदान करने की शक्तियां प्रदत्त करने का अनुरोध किया।
राष्ट्रीय उर्जा योजना के तहत प्रदेश की अनेक जल विद्युत परियोजनाएं सम्मिलित नहीं करने पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जल विद्युत परियोजनाओं के मामले में केंद्र सरकार उत्तरी, पूर्वी राज्यों, जम्मू—कश्मीर, सिक्किम में स्थापित परियोजनाओं को मेगा परियोजना का दर्जा प्रदान करने के नियम में छूट देने पर विचार कर रही है। इसमें हिमाचल को भी कवर किया जाना चाहिए।










