एक्सपेंशन के रास्ते पर है पेक
चंडीगढ़. तमाम विवादों को पीछे छोड़ते हुए पेक यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी ने एक्सपेंशन की रूपरेखा तैयार करनी शुरू कर दी है। इसके अमल में आते ही उत्तर भारत के छात्रों को इंजीनियरिंग के लिए दक्षिण या दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। विद्यार्थियों की संख्या डेढ़ गुणा बढ़ जाएगी।
पेक के अधिकारी मदद के लिए चंडीगढ़ प्रशासन से बातचीत कर चुके हैं। आगामी दो माह में एक्सपेंशन का पूरा ड्राफ्ट तैयार करके चंडीगढ़ प्रशासन को सौंपा जाएगा। एक दशक में यह प्लान पूरी तरह अमल में आएगा। पांच साल बाद इसके परिणाम सामने आने लगेंगे।
देश के टॉप—20 इंजीनियरिंग संस्थानों में जगह बनाने के बाद पेक अगले 20 बरसों की जरूरतों के हिसाब से एक्सपेंशन करने की तैयारी में जुटा है। इसके लिए दो तरह का शॉर्ट और लॉन्ग टर्म प्लान बनाया जा रहा है।
शॉर्ट टर्म प्लान
शार्ट टर्म प्लान में नए कोर्स शुरू करने के लिए हॉस्टल, ऑडिटोरियम और दूसरी सुविधाओं के लिए ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। इसमें दो दशक की जरूरते हैं। इस प्लान में मौजूदा विभागों में सीटें बढ़ाने के साथ नए विभाग खोलने की योजना है। यूजीसी के देश की डीम्ड यूनिवर्सिटी को अपग्रेड करने के निर्देशों के बाद पेक ने एक्सपेंशन का यह निर्णय लिया है।
पेक के डॉयरेक्टर डॉ. मनोज दत्ता कहते हैं इस प्लान के संदर्भ में गवर्निग बॉडी की 11 नवंबर को हुई बैठक में गृह सचिव रामनिवास से बातचीत हुई है। नए हॉस्टल और इन्फ्रास्ट्रक्चर की डिजाइन में प्रशासन की मदद लेनी पड़ेगी। ड्राफ्ट तैयार होने का काम अंतिम दौर में है। इसके बाद इसकी लागत सामने आएगी। इस प्लान को पांच से दस साल में पूरा किया जाना तय है। इस एक्सपेंशन में वित्तीय मदद का ज्यादातर हिस्सा केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय से लिया जाएगा।










