प्रदेशाध्यक्ष पद को लेकर घमासान
चंडीगढ़. हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस के सभी खेमे सक्रिय हो गए हैं। इस पद पर भी मुकाबला कम रोचक नहीं होगा। एक ऐसी स्थिति में जब सत्ता व संगठन के बीच तालमेल के बनी समन्वय कमेटी में बीरेन्द्र सिंह प्रभावी पद होने के कारण सत्ता के साथ संगठन की बागडोर भी भूपेन्द्र सिंह हुड्डा अपने पक्ष के किसी नेता को थमाना चाहेंगे।
बताते हैं कि फूलचंद मुलाना इस पद को छोड़ना चाहते हैं। पूर्व वित्तमंत्री बीरेन्द्र सिंह के फूलचंद मुलाना से त्यागपत्र मांगने के बाद प्रदेशाध्यक्ष का पद खासा विवाद में है। बीरेन्द्र सिंह के बाद कई अन्य नेता भी दबी जुबान से प्रदेशाध्यक्ष बदलने की बात दोहरा चुके हैं। बताते हैं कि कांग्रेस जल्द ही फतेहाबाद में रैली करने जा रही है, उससे पहले नया प्रदेशाध्यक्ष बनाने की जुगत बिठाई जा रही है।
इस पद के लिए प्रभावी नेताओं में राव इंद्रजीत सिंह, कुलदीप शर्मा, विनोद शर्मा का नाम फिलहाल चर्चा में हैं। किसी जाट नेता को संभवत: कांग्रेस यह पद नहीं देगी। इसके पीछे कारण जातिगत संतुलन साधना बताया जा रहा है। जहां तक अनुसूचित जाति का सवाल है, केन्द्र में कुमारी सैलजा, राज्य मंे गीता भुक्कल, रामकिशन फौजी, जयबीर वाल्मीकि झंडी लगी कार लिए हुए हैं जबकि वर्तमान प्रदेशाध्यक्ष फूलचंद मुलाना को बीस सूत्रीय कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया हुआ है।
देखा जाए तो मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने जातिगत संतुलन बड़ी सूझबूझ से साधा है। ऐसे में प्रदेशाध्यक्ष पद पर जंग कम नहीं है। राव इंद्रजीत सिंह भी अपनी ठोस दावेदारी लिए हुए हैं। उनकी दावेदारी इस बात से भी मजबूत हो जाती है कि उनको केन्द्र में मंत्री का पद नहीं दिया गया, इसके अलावा उनके भाई विधायक यादवेन्द्र सिंह झंडी लगी कार से वंचित रहे। हरियाणा की राजनीति में इनका अपना प्रभाव है।
ऐसे में उनका दावा भी कहीं न कहीं मजबूत बन जाता है। वैसे उनकी राह में अहीरवाल के तीन नेता अजय सिंह यादव, राव दान सिंह व अनिता यादव रोड़ा बनेंगे, जिनको हुड्डा झंडी लगी कार दे चुके हैं। ऊपरी संपर्को के आधार पर वे बाजी मार सकते हैं। दूसरा इनको हुड्डा विरोधी खेमे के नेताओं का समर्थन मिल सकता है,नुकसान हुड्डा के निकट नहीं होने का हो सकता है। कुलदीप शर्मा व विनोद शर्मा में से कोई भी बनें, दोनों हुड्डा खेमे के हैं।
हुड्डा खेमे के लिए पद क्यों जरूरी
हुड्डा के विरोधी बीरेंद्र सिंह समन्वय समिति के महत्वपूर्ण पद पर हैं। इस कमेटी का सीधा संपर्क सोनिया गांधी या केन्द्र के प्रभावी नेताओं से होता है। ऐसी समितियां कांग्रेस ने पूरे देश में बना रखी है। राजनीतिक विशेषज्ञ बताते हैं कि दूसरे शब्दों में कहें तो इस समिति को कांग्रेस के सबसे बड़े दरबार में सरकार के खिलाफ कान भरने के पूरे अवसर मिलते हैं।
ऐसे में यह सब जानते हैं कि बीरेन्द्र सिंह कहां चूकने वाले हैं, वे अपने पद के प्रभाव का पूरा प्रयोग करेंगे। अगर हुड्डा के पक्ष का प्रदेशाध्यक्ष नहीं बना तो बीरेन्द्र सिंह को ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे हुड्डा के सामने नई परेशानी खड़ी हो सकती है, ऐसे में वे अब तक की जीत में एक सितारा और जड़ने का पूरा प्रयास करेंगे।










