राशन दुकानों के खिलाफ नाम की कार्रवाई
रतलाम. एक ओर 108 दुकानों पर अनियमितता पाई गई थी उनमें से कितनी दुकानों पर कार्रवाई हुई इस संबंध में जब खाद्य विभाग से पूछा तो विभाग का जवाब था कि १क्८ दुकानों को नोटिस जारी करते हुए ७१ दुकानों पर कार्रवाई की गई है जबकि दुकान संचालक समिति को इसमें सीधे-सीधे बचाया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त संबंधित एसडीओ को कार्रवाई के लिए विभाग ने जिम्मेदारी दे दी है। अब खाद्य विभाग को इससे कोई लेना-देना नहीं है कि एसडीओ ने क्या कार्रवाई की। चौथा माह होने को है फिर भी अनियमितता दूर करने के लिए कोई ठोस कार्रवाई राशन दुकानों के खिलाफ नहीं की गई है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत विभिन्न समितियों को राशन की दुकानें आवंटित की गई थी जहां पर अनियमितताओं की शिकायतें शासन को मिल रही थी। सभी जिला अधिकारियों को २क् जुलाई से २क् अगस्त तक राशन दुकानों की सघन चेकिंग के निर्देश दिए गए थे। इसके तहत १क्८ दुकानों में अनियमितताएं पाई गई थी।
जिनमें कई अनियमितताएं तो स्टॉक से अधिक खाद्यान्न रखने, अन्य राशन दुकानों के राशन कार्ड पाए जाने और स्टॉक से कम खाद्यान्न पाए जाने जैसी गंभीर अनियमितताएं मिली थी। इन अनियमितताओं पर कार्रवाई संबंधित एसडीओ करेंगे यह कहकर विभाग अपना पल्ला झाड़ रहा है जबकि यह कार्य भले ही एसडीओ के कार्य क्षेत्र का हो किंतु इसे अमलीजामा पहनाना खाद्य विभाग की जिम्मेदारी है।
अभियान में अनियमिमता मिलने के बाद भी राशन दुकानों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने पर राज्य शासन के खाद्यान्न नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सहायक संचालक ने नवंबर के दूसरे सप्ताह में पत्र क्रमांक २क्४९ के माध्यम से खाद्य विभाग से जवाब-तलब भी किया है।
पत्र में अनियमितता मिलने पर क्या कार्रवाई की गई इस संबंध में जवाब मांगा गया है। पत्र में विभिन्न बिंदुओं के तहत जांच में अनियमितता पाए जाने पर कितनी दुकानों के लाइसेंस निरस्त किए। कितने व्यक्तियों, दुकानों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
इधर विभाग ने सिर्फ नोटिस जारी कर दिए हैं और जवाब नहीं आने पर इन दुकानों की समितियों के लिए स्मरण-पत्र भेजने की औपचारिकता निभा दी है। न तो दुकानों के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं और न ही उनका खाद्यान्न कोटा रोका गया है। ऐसी स्थिति में अनियमितता पर रोक लग पाएगी यह कहना मुश्किल है।
लीड संस्था ही संचालित कर रही है राशन दुकानें कहीं भी यह नियम नहीं है कि जो संस्था राशन दुकानों को खाद्यान्न वितरण करती है वह हितग्राहियों को सीधे राशन कार्ड के माध्यम राशन वितरित करे। जिले में इस कार्य के लिए संचालित थोक उपभोक्ता भंडार जो कि जिले की लीड संस्था वह भी राशन दुकानों का संचालन कर रही है।
यह दुकानों एक-दो नहीं बल्कि 6 राशन की दुकानें उनके अधिकार क्षेत्र में हैं जबकि यह नियम वितरीत है। इस संदर्भ में जनसुनवाई के तहत भी आपत्ति ली गई है किन्तु राजनीतिक दबाव के चलते कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है। इन दुकानों को भी सहकारी समिति गठित कर उनके माध्यम से संचालित किया जाना चाहिए था।










