डीएनए जांच के लिए कानून
जयपुर. केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदंबरम ने कहा है कि देश में डीएनए जांच को वैधानिकता दिलाने के लिए एक कानून लाया जा रहा है। इसके लिए विधेयक तैयार हो चुका है, जिसको जल्द ही संसद की मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
दुनिया के 30 देशों में यह कानून पहले से ही मौजूद है। चिदंबरम रविवार को यहां राजस्थान पुलिस एकेडमी में 20वीं ऑल इण्डिया फोरेंसिक साइंस कॉन्फ्रंेस के उद्घाटन पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अपराधों की रोकथाम और फोरेसिंक साइंस को सुदृढ़ करने के डीएनए का डाटा बैंक तैयार कर उसको देशभर की फोरेंसिंक साइंस लेबोरेट्रीज से जोड़ा जाएगा, ताकि आपराधिक जांच प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा सके। नई तकनीक को अपनाने में सावधानी बरतनी होगी, फोरेंसिक विशेषज्ञों का उद्देश्य भरोसेमंद परिणाम प्राप्त करना होना चाहिए।
इस साल देश की फोरेंसिक साइंस लैब्स के आधुनिकीकरण के लिए केंद्र सरकार ने 300 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। देश भर में छह नई क्षेत्रीय फोरेंसिक साइंस लैब की स्थापना के साथ 52 नई मोबाइल फोरेंसिक यूनिट भी बनाई जाएंगी। इसी के साथ तीन नई केंद्रीय हाईटेक फोंरेंसिक लैब और तीन स्थापित की जाएंगी तीन नई हाईटैक सेन्ट्रल जीइक्यूडी लैब खोलने का प्रस्ताव है।
क्राइम सीन को सुरक्षित रखें : चिदंबरम ने कहा कि हमारे यहां पर अपराधों के साक्ष्यों को लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रखा जाता, जबकि क्राइम सीन को सुरक्षित रखना सबसे जरूरी है ताकि इन्वेस्टिगेशन सुव्यवस्थित तरीके से पूरा हो सके। आगामी दिनों में डीएनए डाटा मैनेजमेंट, फायर आर्म सिग्नेचर डाटा बैंक, क्रिमिनल ट्रैकिंग सिस्टम और नेटवर्किग सिस्टम को लागू किया जाएगा।
फोरेंसिक विशेषज्ञ दबाव में न आएं: गहलोत
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि फोरेन्सिक विशेषज्ञ लैब में जांच निष्पक्ष रूप से करें और किसी प्रकार के दबाव में न आएं। इस भावना से काम करने पर इस क्षेत्र में आमजन में उनके प्रति विश्वसनीयता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि देश में आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से आतंकवाद एवं नक्सलवाद की चुनौतियां हमारे सामने हैं। केन्द्रीय गृह मंत्री इससे चिंतित है और वे देश हित में इन चुनौतियों के खिलाफ कड़े कदम उठाना चाहते हैं, जिसमें पूरा मुल्क उनके साथ है।
राजस्थान में फोरेन्सिक लैब ने अच्छा कार्य किया है। जयपुर बम ब्लास्ट में अमोनियम नाइट्रेट जैसे रसायन के उपयोग का खुलासा हमारे फोरेन्सिक विशेषज्ञों ने ही किया था। राज्य सरकार फोरेन्सिक विशेषज्ञों को साइबर क्राइम की रोकथाम, वॉइस आइडेंटिफिकेशन आदि के नवीनतम उपकरण उपलब्ध कराने में पीछे नहीं रही।
गृहमंत्री शान्ति धारीवाल ने कहा कि कि जयपुर में मुख्य प्रयोगशाला के अलावा जोधपुर, उदयपुर एवं कोटा में क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं (एफएसएल) की स्थापना की जा चुकी है। इस साल बीकानेर में क्षेत्रीय प्रयोगशाला खोली जा रही है। फोरेन्सिक लैब में पहले 8 से 9 वर्ष परीक्षण में लगते थे, परन्तु अब यह परीक्षण 2- से 3 वर्ष में हो जाता है।
आर्म्स एक्ट में होगा संशोधन
अपराधों की बदलती प्रवृति और समय को देखते हुए केंद्र सरकार आर्म्स एक्ट और इसके नियमों में भी संशोधन करने जा रही है। इसके लिए नई आर्म्स नीति बनाई जा रही है।
वर्ल्ड क्लास बनेगी देश की एफएसएल
चंडीगढ़ स्थित देश की सर्वश्रेष्ठ फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) वाशिंगटन स्थित दुनिया की सर्वश्रेष्ठ एफएसएल से अभी कई मायनों में पीछे है। अगले साल तक इसे भी सर्वश्रेष्ठ बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी एफएसएल और वाशिंगटन एफएसएल में हार्डवेयर के स्तर पर कोई अंतर नहीं है लेकिन एप्लीकेशन और सॉफ्टवेयर का स्तर पीछे हैं। केंद्र सरकार ने देश में फारेंसिक साइंस के विकास और एफएसएल को मजबूत बनाने के लिए 2010 को फारेंसिक साइंस वर्ष के रूप में मनाने का फैसला किया है।










