Monday, November 16, 2009 04:29 [IST]  

danik bhaskarकम नहीं हुआ बंधेज का क्रेज

Bhaskar.Com

bजोधपुर. शादियों के सीजन में लेडीज चाहे कितनी ही वैरायटी और डिजायनर साड़ियां क्यों न खरीद लें, लेकिन जब तक जोधपुरी बंधेज की साड़ियां, सलवार सूट, चुन्नी, लंहगा न खरीदें, उनकी शॉपिंग जैसे अधूरी रहती है। इसमें जहां रेड, ग्रीन, ब्लू और रानी कलर्स में कई डिजाइन और वर्क में यह साड़ी मिल जाएगी।



वहीं पचरंगी कलर में इसकी डिमांड सबसे ज्यादा बनी हुई है। बंधेज साड़ी की सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह हैंडीकाफ्ट है। आज जोधपुरी बंधेज वर्ल्ड फेमस हो चुका है और पर्यटक भी इसे बहुत पसंद कर रहे हैं।



फैशन ने बढ़ाई मांग



जोधपुरी बंधेज को आज किसी भी फैशन शो में देखा जा सकता है। इसका फैशन डिजाइनर लंहगे व साड़ी में बहुत ही नए लुक में एक्सपेरीमेंट कर रहे हंै। इसे अन्य फैबरिक के साथ बहुत ही खूबसूरती से पेश किया जाता है। इससे इसकी डिमांड में काफी इजाफा हुआ है। इसे सलवार सूट में भी डिजाइनर लुक में पेश किया जा रहा है। इसकी खासियत है इसके चटख रंग और उस पर मोती और स्टोन वर्क जिससे इसके लुक में और भी इजाफा हो जाता है।



क्या-क्या बनाया जाता है बंधेज में



बंधेज में सबसे अधिक साड़ियां ही बनाई जाती हैं। जिन्हें जोधपुर से देश के अन्य स्थानों पर भी भेजा जाता है। क्योंकि पिछले कुछ साल से बंधेज पर डिजाइनर वर्क शुरू हुआ है इसकी डिमांड तेजी से बढ़ी है। शादी में पहने जाने वाले लंहगे, सलवार सूट, चुन्नी और स्कार्फ की भी अच्छी खासी डिमांड है।



इसे कॉटन, आर्टिफिशल, प्योर जॉरजट व प्योर शिफोन में बनाया जाता है। इसकी रेंज उसके डिजाइन के मुताबिक होती है। जितना बारीक बंधेज, उतनी ही कॉस्ट बढ़ती जाती है। इसे बनाने में कम से कम 20 दिन और अधिक से अधिक 6 महीने तक लग जाते हैं। क्योंकि इसे पूरी तरह हाथ से तैयार किया जाता है तो इसकी कीमत भी कुछ अधिक हो जाती है।



बंधेज की प्रोसेसिंग



बंधेज वर्क को महिलाएं शुरू से लेकर अंत तक हाथ से ही बनाती है। इसमें कपड़े को धागे से बांधना, स्टीचिंग करना, डिजाइन करना, ब्लीच करके डाई करना और फिर धागे खोलना सब हाथ से कड़ी मेहनत से होता है। इसके बाद इस पर जरी, सिल्वर और एम्ब्रॉयडरी वर्क सब हाथ से ही किया जाता है।



इसे बनाने में काफ ी समय लग जाता है। सादात ए फैबरिक के ऑनर मोहम्मद आबिद का कहना है कि बंधेज वर्क पूरी तरह से महिलाएं हाथ से करती हैं। इसे बहुत बारीक बांधना पड़ता है, इसमें जितना बारीक काम होगा, यह उतनी ही अधिक आकर्षक बनती है। बंधेज करते समय सबसे मुश्किल काम है इसे ब्लीच और डाई करना। क्योंकि पानी को 90 डिग्री उबाल कर इसे किया जाता है। यह काम गर्मियों में करना बहुत मुश्किल होता है। बंधेज साड़ी की कीमत लगभग 200 से 2500 रुपए तक होती है। वहीं सलवार सूट भी लगभग इसी रेंज में मिल जाते हैं। यह हमारा पुश्तैनी काम है, यह इतना ट्रेडिशनल है कि अभी भी इसमें शहर की पारंपरिकता देखी जा सकती है।



बंधेज वर्क के बारे में बताते हुए राजू साड़ी मॉल के ऑनर कहते हैं कि जोधपुरी बंधेज अब वर्ल्ड फेमस हो चुका है। यहां तक कि सैलानी इसे वॉल पेटिंग और फ्रेमिंग कराने के लिए भी पंचरंगी बंधेज को पसंद कर रहे हैं। मार्केट की स्थिति तो यह है कि आज डिमांड के मुताबिक प्रोडक्शन नहीं हो रहा है। इसे हाथ से बनाने के कारण तैयार होने में काफी समय लग जाता है।

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